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किसानों का कर्ज कैसे उतार पायेंगे कैप्टन

Posted On April - 8 - 2017

10804cd _punjab_farmersहमीर सिंह
जय जवान-जय किसान का नारा बीते दिनों की बात हो गयी है। स्वतंत्रा के 70 वर्ष बाद भी देश का अन्नदाता खुदकुशी करने को मजबूर हैं। तीन लाख से ज्यादा किसान खुदकुशी कर चु्के हैं। इसके असल कारण तलाशने के लिए कोई गंभीर संवाद रचाने के बजाय इस समय किसानों के ऋण को माफ करने या न्ा करने को लेकर सियासत हो रही है। केंद्र सरकार ने संसद में स्पष्ट जवाब दे दिया है कि किसी राज्य के पास अपने स्तर पर गुंजाइश है तो अपने किसानों का ऋण माफ कर दे? बैंकों का कहना है कि ऋण माफी अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी नहीं होगी। वोट बैंक के दबाव में हर सियासी पार्टी किसानों का ऋण माफ करने का वादा कर रही है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद ऋण माफी का वादा ही नहीं किया, बल्कि इसका फैसला मंत्रिमंडल की पहली बैठक में करने की समय सीमा तय कर दी थी। यूपी के मुख्यमंत्री योगी अदित्यनाथ ने इस वादे को अधूरा ही सही निभा तो दिया। सरकार ने छोटे और सीमांत करीब 2.15 करोड़ किसानों का एक लाख रुपये तक का ऋण माफ कर दिया। लगभग 36359 करोड़ रुपये लोन के हैं और इसमें 5630 करोड़ रुपये वह ऋण भी है जिसे किसान वापस नहीं कर पाए। बैंकिंग की भाषा में इसे बैड लोन या नान प्रफाॅरमिंग असेटस (एनपीए) कहा जाता है। इस फैसले ने अन्य राज्यों की सरकारों पर भी ऋण माफी का दबाव बढ़ गया है। पंजाब-हरियाणा में भी ऋण से पीड़त किसानों को उम्मीद लगी है। पंजाब में तो कैप्टन अमरेंद्र सिंह की सरकार ने किसानों के पूरे कर्जे माफ करने का वादा कर रखा है।
रिजर्ब बैंक आॅफ इंडिया के आदेश पर 2015-16 में बैंकों ने पहली बार छोटे और सीमांंत किसानों के ऋण का अलग से ब्योरा  रखना शुरू किया है। इसके मुताबिक 31 मार्च, 2016 तक पंजाब के किसानों पर संस्थागत (व्यापारिक बैंक, सहकारी बैंक और सभाओं समेत) 90 हजार करोड़ रुपये का ऋण है। इसमें से 74 हजार करोड़ क्रॉप लोन और शेष 15 हजार करोड़ से ज्यादा टर्म (लंबे समय का) लोन है। बैंकों में पंजाब के किसानों के 29,76,416 खाते हैं। इनमें से छोटे और सीमांत किसानों के 15,13,404 खाते हैं। बैंकों के अनुमान के अनुसार, लगभग 50.83 फीसदी खाते और 37.93 फीसद ऋण छोटे किसानों के सिर पर है। छोटे और सीमांत किसानों के 30,687 करोड़ के क्रॉप लोन के अलावा डिफाल्टर ऋण केवल 2800 करोड़ रुपये है। पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला के अर्थशास्त्र विभाग के प्रोफेसर ज्ञान सिंह के नेतृत्व में हुए अध्ययन के अनुसार, पंजाब के सीमांत किसानों पर प्रति एकड़ 1,40,670 करोड़ का कर्ज है। छोटे किसानों के सिर 1,20,794 रुपये का ऋण है। पंजाब में कृषि से 77000 करोड़ रुपये का शकल घरेलू उत्पाद का अनुमान है। राज्य के किसानों की मुख्य फसलें धान और गेहूं हैं। धान की प्रति एकड़ औसतन पैदावार 24 क्विंटल और गेहूं की 18 क्विंटल है। 1500 रुपये क्विंटल के हिसाब से इससे साल भर में किसानों को 63000 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से आमदन हो सकती है। इसका स्पष्ट अर्थ है कि किसान के सिर आमदन से दोगुणा ऋण है।
कैप्टन सरकार अब विशेषज्ञों की समिति बनाकर कुछ समय और निकाल देना चाहती है। चुनाव घोषणापत्र कानूनी दायरे में न आने के कारण सियासी पार्टियां हर तरह के वादे करती हैं और बाद में लागू करने से पीछे भी हट जाती हैं। जैसे मोदी सरकार स्वामीनाथन रिपोर्ट के मुताबिक किसानों को फसल के रेट में 50 फीसदी मुनाफा जोड़कर देने के वादे से पीछे हट गयी। इस बार माहौल ऐसा है कि कैप्टन सरकार पीछे नहीं हट पाएगी। लेकिन सवाल यह है कि पहले ही 1.83 लाख करोड़ रुपये के कर्ज में बैठी पंजाब सरकार यह वादा पूरा कैसे करेगी?
केंद्र सरकार कारपोरेट घरानों को इनसेंटिव के नाम पर भारी छूट दे देती है। पिछले बजट में 6.11 लाख करोड़ की ऐसी ही छूट कारपोरेट जगत को दी गयी। लेकिन किसानों की बारी आयी तो केंद्र ने सारा दारोमदार राज्यों पर डाल दिया। राज्यों की आर्थिक स्थिति पहले से ही बदतर है। बहरहाल, सरकारें इस दिशा में सोचती दिखाई नहीं दे रही।


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