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दीवाली ऑनलाइन डील वाली

Posted On November - 8 - 2015

हरेन्द्र चौधरी

बारगेन करने का इससे बेहतर मौका क्या हो सकता है, जब इंडिया के टॉप 3 ई-रिटेलर्स एक साथ फेस्टिव सीजन के दौरान 80 परसेंट से ज्यादा का डिस्काउंट ऑफर कर रहे हों। फेस्टिव सीजन में ई-कॉमर्स कंपनियों की डिस्काउंट्स की सौगात इस साल भी ऑनलाइन कस्टमर्स के लिए मुनाफे वाली साबित हुई। फैशन ब्रांड्स से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम्स पर जबरदस्त डिस्काउंट देखने को मिले। वहीं कंज्यूमर्स भी इस बार ज्यादा डिस्काउंट के लालच में एप्स के बीच झूलते रहे।

मंदी में कमाल!
लोगों की जेब से पैसा निकालने की चाबी ऑनलाइन कारोबारियों के हाथ लग गई है। पिछले कुछ सालों से ट्रेंड देखने को मिल रहा है कि बाजार की कमान रिटेल व्यापार के हाथों से फिसल कर ऑनलाइन कारोबारियों के हाथों में जा रही है। बाजार में पैसा न होने के बावजूद कस्टमर्स ने बेहतर डिस्काउंट के साथ ऑनलाइन शॉपिंग की। खुद फ्लिपकार्ट के आकड़ों के मुताबिक इस साल ‘बिग बिलियन डे’ के पहले दिन उन्होंने प्रति सेकेंड 25 आइटम बेचे और पहले 10 घंटे में 10 लाख प्रोडक्ट्स बिके और देश के 60 लाख लोगों ने साइट को पहले दिन विजिट किया। वहीं, इस मेगा सेल के दौरान कई रिकॉर्ड भी बने। फ्लिपकार्ट ने इस बार 10 घंटों के शॉर्ट पीरियड में 5 लाख 4जी मोबाइल फोन बेचे। फ्लिपकार्ट के कॉमर्स प्लैटफॉर्म के हेड मुकेश बंसल के मुताबिक फ्लिपकार्ट के लिए मोबाइल कैटेगरी सेल ब्लॉकबूस्टर साबित हुआ है। वावे एंड ऑनर कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के डायरेक्टर सेल्स पी. संजीव के मुताबिक उनके लेटेस्ट हैंडसेट ऑनर 7 की 1000 यूनिट्स एक घंटे से भी कम वक्त में बिक गयीं। स्नैपडील ने सेल के दौरान हर सेकेंड 5 मोबाइल फोन बेचे और 500 करोड़ के मोबाइल फोन बेचने का दावा किया। खुद अमेजन के मुताबिक अपलाइंसेज, टेलीविजन, हेल्थ एंड पर्सनल केयर और मूवीज कैटेगरीज की सेल में पिछली मेगा सेल के मुकाबले 3 से 7 गुना की बढ़ोतरी देखने को मिली है। पिछले साल फ्लिपकार्ट ने 6 अक्टूबर को ‘बिग बिलियन डे’ पर 615 करोड़ की सेल की थी, भारतीय बाजार के लिए यह सेल किसी अजूबे से कम नहीं थी। लेकिन इस छूट का सबसे बड़ा फायदा ग्राहकों को ही मिला।

एप पर फोकस
इस बार की सेल का सबसे बड़ा क्रेडिट मोबाइल एप्स को जाता है। ‘बिग बिलियन डे’ की शुरूआत के दो दिनों में 16 लाख एप्स डाउनलोड की गई। स्नैपडील की 5 लाख एप्स डाउनलोड की गईं। अमेजन के मुताबिक 70 परसेंट ट्रैफिक मोबाइल से आया। ई-कॉम कंपनियों को मोबाइल एप के रूप में ऐसी चाबी मिल गई है, जो सीधे कंज्यूमर की नब्ज तक पहुंचती है। आने वाले वक्त में सभी ई-कॉम कंपनियों का फोकस एप पर रहने वाला है। फैशन साइट मिंत्रा पहले ही एप पर फोकस कर चुकी है। फ्लिपकार्ट जल्द ही केवल एप बेस्ड शॉपिंग पर ही फोकस करने वाला है। दूसरी ई-कॉम कंपनियां भी इस राह पर हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह है एनालिटिक्स। ई-कॉम कंपनियों की सक्सेस की वजह ये एनालिटिक्स ही हैं, जो उन्हें मोबाइल बेस्ड होने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं। इस साल वेब और एप के लिए अलग-अलग डिस्काउंट पैरामीटर तैयार किए गए। अमेजन जहां वेब पर 10 परसेंट का डिस्काउंट ऑफर कर रही थी, तो एप पर 15 परसेंट। वहीं फ्लिपकार्ट एप से शॉपिंग करने पर 10 परसेंट ऑफ के साथ कैशबैक, हॉलिडे पैकेज ऑफर कर रही थी।

डीप डिस्काउंट
ऑनलाइन फेस्टिवल सेल की सबसे बड़ी खासियत रही कि ज्यादातर डीप डिस्काउंट्स उन्हीं ब्रैंड्स पर दिए गए, जिनका प्राइम फोकस एक्सक्लूसिवली ऑनलाइन है। माइक्रोमैक्स, ऑनिडा, बीपीएल, मोटोरोला, शियोमी, वनप्लस, वू जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स ब्रैंड्स के अलावा गैजेट्स और स्मार्टफोन के पुराने मॉडल्स पर एक्स्ट्रा डिस्काउंट ऑफर था। पुराने आइफोन 6 का 16 जीबी अलग-अलग साइट्स पर 37,999 से लेकर 39,999 में मिल रहा था। यही ट्रेंड अपेरल और एसेसरीज में भी रहा। ई-कॉमर्स कंपनियां इन-हाउस अपेरल ब्रांड्स या इंटरनेशनल ब्रैंड्स पर डीप डिस्काउंट ऑफर कर रही थीं, जहां मार्जिन दूसरी क्लॉथ्स ब्रैंड्स के मुकाबले दोगुना होता है। या फिर डीप डिस्काउंट पुराने या लास्ट सीजन स्टॉक पर था। ब्रैंडेड प्रोडक्ट्स पर डिस्काउंट केवल 4 से 10 परसेंट दिखा, जो नॉन-ब्रैंडेड पर 60 से 80 परसेंट तक था। यहां तक कि कुछ बड़ी कंपनियों ने तो बड़ी ई-कॉमर्स फर्म्स के साथ एग्रीमेंट भी साइन किया कि उनके प्रोडक्ट्स पर शार्प प्राइस कट न दिया जाए, क्योंकि इससे ऑफलाइन रिटेलर की सेल प्रभावित होती है और ब्रैंड की बदनामी।

टियर-टू सिटीज
अब ऑनलाइन खरीदारी की कमान टियर-टू सिटीज के हाथ में जा रही है। अमेजन इंडिया ने उनकी फेस्टिव सेल के पहले दिन को एेतिहासिक बताते हुए खुलासा किया कि उनके 70 परसेंट नए ग्राहक औरंगाबाद, मल्लाप्पुरम, धनबाद, कन्नूर, तिरुचिरापल्ली, जमशेदपुर जैसे शहरों से थे। यानी कि ऑनलाइन शॉपिंग का खुमार टियर-टू और थ्री सिटीज में पहुंच रहा है। जैसे-जैसे स्मार्टफोन नॉन-मेट्रो सिटीज में अपनी पहुंच बना रहे हैं, वैसे ही ऑनलाइन शॉपिंग भी इन शहरों में रफ्तार पकड़ रही है। फ्लिपकार्ट का दावा था कि इस साल बिग बिलियन डे सेल में बेंगलूरू, दिल्ली-एनसीआर और मुंबई टॉप रहे, लेकिन नागपुर, इंदौर, कोयंबटूर, विशाखापट्टनम, जयपुर, लखनऊ, लुधियाना और भोपाल जैसे शहरों से भी जमकर शॉपिंग हुई।

 बैंकों की मौज
इस साल की फेस्टिव सेल ई-रिटेलर्स, कंज्यूमर्स और बैंकों के लिए मुनाफे का सौदा साबित हुई। अपनी स्ट्रेटेजी में थोड़ा चेंज लाते हुए इस बार ई-कॉम कंपनियों ने कैश ऑन डिलिवरी जैसे ऑप्शंस को दरकिनार करते हुए ऑनलाइन पेमेंट्स पर खासा फोकस किया। ज्यादातर डीप डिस्काउंट ऑनलाइन पेमेंट्स पर ही मौजूद रहे। अमेजन पर जहां एचडीएफसी क्रेडिट, डेबिट या नेट बैकिंग से ऑनलाइन पेमेंट करने पर 15 परसेंट की छूट मिल रही थी, तो फ्लिपकार्ट ने सेल के दौरान इसके लिए अलग-अलग दिन के हिसाब से बैंकों के साथ एग्रीमेंट किया था। एक्सचेंज और एडिशनल डिस्काउंट ऑफर्स के लिए यस बैंक, स्टैंडर्ड चार्टर्ड और सिटी बैंक के साथ टाइ-अप किया गया। फ्लिपकार्ट के मुताबिक 50 परसेंट कस्टमर्स ने बैंक ऑफर्स का फायदा उठाया।

एफिलेट्स साइट्स
तीनों बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों फ्लिपकार्ट, स्नैपडील और अमेजन की सेल एक साथ आने का फायदा कंज्यूमर्स को जबरदस्त मिला। इससे उनके लिए वेट एंड वॉच का ऑप्शन नहीं बचा, लेकिन कंज्यूमर्स के लिए कन्फ्यूजन की स्थिति तब बन गई कि उनका फेवरेट प्रोडक्ट किस साइट पर सबसे सस्ता मिल रहा है। ऐसे में एफिलेट्स साइट्स ने प्राइस, फीचर और स्टाइल का कंपेरिजन करके कंज्यूमर्स की मुश्किल आसान कर दी। इन साइट्स पर यूजर प्राइस, फीचर और स्टाइल का कंपेरिजन कर सकता है, जिससे उन्हें सही प्रोडक्ट चुनने में मदद मिलती है। इस सेल का फायदा इन्हें भी मिला और ट्रैफिक 40-50 परसेंट बढ़ गया, वहीं कनवर्जन में भी 2.5 से 3 परसेंट की बढ़ोतरी हुई। हालांकि ये एफिलेट्स साइट्स यूजर से कोई चार्ज नहीं करती, लेकिन ई-कॉम कंपनियों से 1 से 10 परसेंट का कमिशन लेती हैं।

फटाफट लॉन्च
इंडिया की इस सुपरहिट सेल का फायदा उठाने में उन कंपनियों ने कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी, जो अभी तक इंडियन मार्केट को ज्यादा तरजीह नहीं देते थे। एपल जैसी कंपनी ने, जिसने 25 सितंबर को अमेरिका, यूके जैसे देशों में आईफोन 6एस और 6एस प्लस को सेल के लिए रखा था, 20 दिन से भी कम वक्त के भीतर ही 16 अक्टूबर को इंडिया में लॉन्च कर दिया। पहले एपल की डिवाइसेज की इंडिया में लॉन्चिंग के लिए 2 महीने तक इंतजार करना पड़ता था। वहीं गूगल ने 29 सितंबर को ही नेक्सेस 6पी और नेक्सेस 5 एक्स को लॉन्च किया था और मात्र 15 दिन के भीतर ही इंडिया में अमेजन, फ्लिपकार्ट जैसे ई-कॉमर्स साइट्स के जरिए इसकी प्री-बुकिंग शुरू कर दी। मतलब साफ है कि इंडियन बाजार उनके लिए फायदे का सौदा साबित हो रहा है।

एड सुपरहिट
इस साल ऑनलाइन कंपनियों ने अक्टूबर से लेकर दिसंबर तक 1300 करोड़ रुपये एडवरटाइजमेंट पर खर्च करने की योजना बनाई है, जो 2 हजार करोड़ तक पहुंच सकता है। टैम मीडिया रिसर्च के आकड़ों के मुताबिक इस साल जुलाई से लेकर सितंबर तक 50 ई-कॉमर्स कंपनियों ने 12सौ करोड़ रुपये खर्च किए। मार्केटिंग बजट का 60 से 70 परसेंट हिस्सा केवल टेलीविजन एडवरटाइजिंग पर खर्च हो रहा है। अकेले साल 2015 में 35 सौ करोड़ रुपये टीवी एडवरटाइमेंट पर खर्च किए जाएंगे।

फास्ट डिलिवरी
पिछले साल लॉजिस्टिक्स को लेकर फ्लिपकार्ट की खासी आलोचना हुई थी, लेकिन इस बार स्थिति बिल्कुल उलट रही है। कंपनियों ने ग्राहकों के हाथों में तुरंत सामान पहुंचाने के लिए कई इनोवेशंस किए हैं। अमेजन ने मुंबई, दिल्ली-एनसीआर समेत 11 शहरों में मॉर्निंग डिलिवरी सर्विस शुरू की। इसमें कंस्टमर्स मिडनाइट ऑर्डर करके सुबह 11 बजे डिलिवरी ले सकते थे। हालांकि अमेजन इस सर्विस के अलग से 120 रुपये वसूल रहा था। लेकिन यह ऑप्शन उनके लिए फायदेमंद रहा, जो हाथो-हाथों डिलिवरी चाहते थे। वहीं, स्नैपडील ने ऑर्डर आने के 24 घंटों के भीतर 98.9 परसेंट ऑर्डर डिस्पैच करके नया इतिहास रचा।

कैश ऑन डिलिवरी
कैश ऑन डिलिवरी ऑनलाइन कंपनियों का सबसे बड़ा हथियार है। कैश ऑन डिलिवरी ने इन ऑनलाइन कंपनियों के लिए सेल का एक नया रास्ता खोला है। पेमेंट मैकेनिज्म बदलने से कस्टमर के लिए भी फायदा होता है। लेकिन कैश ऑन डिलिवरी में रिफ्यूजल रेट ज्यादा होता है, जिसका नुकसान ई-कॉमर्स कंपनियों को खुद उठाना पड़ता है, क्योंकि उन्हें लॉजिस्टिक चार्जेज एडवांस में देने होते हैं, ऐसे में कैश ऑन डिलिवरी रिफ्यूजल भारी पड़ता है। वहीं कंपनियां क्रेडिट, डेबिट या नेटबैंकिंग से पेमेंट करने वालों को हमेशा प्रिफरेंस देती हैं। यहां तक कि प्री-पेमेंट करने पर 3 से 5 फीसदी की एक्स्ट्रा छूट भी देती हैं। यह ऐसे कस्टमर्स के लिए फायदे का सौदा साबित होता है, जो ज्यादा डिस्काउंट की उम्मीद रखते हैं। वहीं कंपनियों को भी एडवांस पेमेंट मिल जाती है।

ऑफलाइन बाजार
ऑनलाइन कंपनियां फेस्टिवल सीजन में कंज्यूमर को अट्रैक्ट करने या कस्टमर बनाने के लिए लो मार्जिन में भी सामान बेचने का रिस्क उठा सकती हैं, लेकिन हमेशा 12 महीने हैवी डिस्काउंट ऑफर नहीं कर सकतीं। लो मार्जिन में सामान बेचना कॉम्पीटिशन खत्म करने की स्ट्रैटजी हो सकती है, लेकिन हमेशा इसी स्ट्रैटजी को फॉलो नहीं किया जा सकता। इसका अलावा ऑनलाइन कंपनियों की रीढ़ है लॉजिस्टिक सर्विसेज। वे एक लिमिटेड एरिया में वन डे एक्सप्रेस डिलिवरी तो दे सकती हैं, लेकिन हर जगह यह सुविधा देना मुश्किल है। अमूमन डिलिवरी में 2 से 7 दिन का वक्त तो लगता ही है। इसका फायदा ऑफलाइन रिटेलर्स को मिलता है। तुरंत खरीदारी करने वाले कस्टमर ऑफलाइन बाजार से ही शॉपिंग करना पसंद करते हैं। इसके अलावा ऑनलाइन कंपनियों का यूएसपी है डिस्काउंट, जिसे ऑफलाइन रिटेलर्स अपने मार्जिन में कमी करके भी इन कंपनियों को टक्कर दे सकते हैं।


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