लघु सचिवालय में खुला बेबी डे-केयर सेंटर !    बुजुर्ग कार चालकों से होने वाले हादसे रोकने के विशेष उपाय !    कुत्तों ने सीख लिया है भौंहें मटकाना! !    शांत क्षेत्र में सैन्य अफसरों को फिर से मुफ्त राशन !    योगी के भाषण, संदेश संस्कृत में भी !    फर्जी फर्म बनाकर किया 50 करोड़ से ज्यादा जीएसटी का फर्जीवाड़ा !    जादू दिखाने हुगली में उतरा जादूगर डूबा !    प्राकृतिक स्वच्छता के लिए यज्ञ जरूरी : आचार्य देवव्रत !    मानवाधिकार आयोग का स्वास्थ्य मंत्रालय, बिहार सरकार को नोटिस !    बांग्लादेश ने विंडीज़ को 7 विकेट से रौंदा, साकिब का शतक !    

अब सुरक्षित सफर की हो बात

Posted On December - 21 - 2014

पिछली एनडीए सरकार ने सबसे अधिक जोर परिवहन पर दिया था। तब रेल को सुधारा था नीतिश कुमार ने और सड़क मार्ग को सुधारा था मेजर बीसी खंडूरी ने। स्वर्णिम चतुर्भुज योजना तो इतनी लोकप्रिय हुई कि देश के एक कोने से दूसरे कोने को जोड़ने के लिए सड़कों का संजाल बिछा दिया गया था। इस योजना ने वाकई कायाकल्प कर दिया था और केंद्र की इन हाई प्रोफाइल सड़कों के निर्माण के लिए नेशनल हाईवे अथारिटी ऑफ इंडिया यानी एनएचएआई का गठन हुआ था। एक्सप्रेस वे योजना तब ही सामने आई थी और सड़क मार्ग किस तरह परवान चढ़ें, इस पर सारा जोर लगाया गया था।

शंभूनाथ शुक्ल

किसी भी शहर के विकास के लिए उसके आधारभूत ढांचे की जरूरत होती है कि उस शहर को दूसरे शहरों से जोड़ने वाले सड़क और रेलमार्ग कैसे हैं, वहां बिजली की आपूर्ति निर्बाध है या नहीं और वहां की कानून व्यवस्था कैसी है। इस मामले में इस स्वर्णिम चतुर्भुज योजना ने सड़कों का और शहरों का कायाकल्प कर डाला था। इसके बाद एक्सप्रेस हाईवे बनने शुरू हुए। इसमें मुंबई-पुणे मार्ग तथा वडोदरा-सूरत-मुंबई मार्ग और दिल्ली-जयपुर मार्ग, दिल्ली-चंडीगढ़ तथा दिल्ली-अमृतसर मार्ग महत्वपूर्ण हैं। लेकिन सबसे महात्वाकांक्षी योजना उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री ने साल 2007 में नोएडा-आगरा मार्ग की बनाई। तय हुआ कि 155 किलोमीटर की यह दूरी मात्र डेढ़ घंटे में तय कर ली जाएगी। सिक्स लेन का यह एक्सप्रेस हाईवे यकीनन लाजवाब बना। इसके निर्माण को पूरा किया जेपी समूह ने। दस हजार करोड़ रुपयों की लागत से बना यह हाईवे अब तक बेमिसाल है। मगर देखरेख के अभाव में यह दम तोड़ता जा रहा है। इस हाईवे से 155 कि.मी. की दूरी तय करने पर चार पहिया वाहनों को 320 रुपये देने पड़ते हैं। पर आराम यह है कि दिल्ली से आगरा की दूरी तय करने में जो चार घंटे का समय लगा करता था, वह दो घंटे में निपट जाता है। लेकिन यह एक्सप्रेस हाईवे कई मामलों में कुख्यात भी है। जैसे स्पीड पर कंट्रोल करने की कोई व्यावहारिक व्यवस्था न होने के कारण इस हाईवे पर लगभग रोज ही कोई न कोई दुर्घटना होती है और कैजुअल्टी भी होती हैं। रात के वक्त यहां से गुजरना खतरनाक है क्योंकि सड़क के दोनों तरफ जो बाड़ लगाई गई है, उसे फांद कर कभी कोई कुत्ता, बिल्ली या लोमड़ी तथा अकसर नील गाय भी आ जाया करती हैं। घोड़े के आकार की नील गाय अगर डेढ़ सौ की स्पीड से आ रही कार से टकराएगी तो कार के परखचे उड़ ही जाएंगे। एक और संकट है कोहरे का। दिसंबर से लेकर फरवरी तक तड़के और अगर कोहरा डेंस हुआ तो दिन को भी यहां से चलना खतरनाक होता है। कोहरे से निपटने के लिए आवश्यक पीली लाइट का इंतजाम नहीं है। इसलिए जाड़े में लोगबाग यहां से नहीं गुजरते और इस परियोजना के प्रबंधकों को घाटा उठाना पड़ता है।
इस यमुना एक्सप्रेस को नजीर मानकर उत्तर प्रदेश की अखिलेश यादव सरकार स्वयं अपनी देखरेख में एक सड़क बनवा रही है। 308 कि.मी. लंबे इस एक्सप्रेस वे को यूपी एक्सप्रेस डेवलपमेंट अथारिटी पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) माडल पर बनवा रही है। इसके पुराने यमुना एक्सप्रेस वे से अधिक आधुनिक होने की संभावना है और अगर इस बहुमुखी योजना का कामकाज देख रहे यूपी के सीनियर ब्यूरोक्रेट और प्रमुख सचिव नवनीत सहगल की मानें तो यह कोहरे और गति को स्वत: नियंत्रित करने वाला बेमिसाल हाई वे बनेगा। उनकी बात में दम इसलिए भी है कि इसी अथारिटी ने लखनऊ में बाराबंकी रोड से कानपुर रोड के बीच एक रिंग रोड बनाई है जो कई मायनों में अत्याधुनिक है। इस रिंग रोड में कोहरे का असर तो नहीं ही पड़ेगा, साथ में इसे यूं बनवाया गया है कि किसी भी हालत में रात के वक्त विपरीत दिशा से आ रहे वाहन की हेड लाइट की रोशनी चालक पर नहीं पड़ेगी। इससे कोहरे से बचाव तो होता ही है, साथ में रात के समय एक्सीडेंट की आशंका न्यूनतम हो जाती है।
असल खतरा सड़क के किनारे खड़े डंपर या ट्रक होते हैं और यूपी की एक्सप्रेस अथारिटी ने किया यह है कि अगर कोई ट्रक या डंपर सड़क किनारे खड़ा पाया गया तो उस पर जुर्माना तो लगेगा ही, साथ में उसका लाइसेंस रद्द किया जा सकता है। अगर इस मकसद के साथ आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे बन गया तो यकीनन दिल्ली से लखनऊ तक की जो यात्रा अभी दस घंटे में पूरी होती है, वह महज पांच घंटे में पूरी हो जाएगी। उम्मीद है कि यह मार्ग दिसंबर 2016 तक जनता के लिए खोल दिया जाएगा।
जाड़े में कोहरा सारे परिवहन को चौपट कर देता है। पूरा उत्तर भारत कोहरे की चपेट में रहता है और इस वजह से न केवल सड़क मार्ग बल्कि रेलमार्ग और हवाई सेवाएं भी अवरुद्ध रहती हैं। अब तक किसी भी सरकार ने कोहरे से निजात पाने के कोई कारगर उपाय नहीं किए। अगर सड़क के बीच रेडियम पट्टी लगाकर भी कोहरे से निपटा जा सकता है तो यह उपाय भी करना चाहिए, भले ही खर्चीला हो क्योंकि सुरक्षा ज्यादा जरूरी है। लखनऊ में रिंग रोड पर इसका ख्याल रखा गया है तो अन्य उत्तरी राज्यों को भी चाहिए कि इस पट्टी का प्रयोग करें। दूसरे डिवाइडर पर घनी झाडि़यां लगाकर तमाम सड़क दुर्घटनाएं टाली जा सकती हैं। इसी तरह सड़क पर बाड़ बहुत जरूरी है। आगरा-लखनऊ हाईवे इस मायने में एक नजीर बन जाएगा। सड़क परिवहन को स्मूथ बनाना एक चुनौती है क्योंकि सड़क मार्ग अब देर सवेर एक अपरिहार्य जरूरत बन जाएगा।
रेलवे को माल ढुलाई के लिए ही अधिक प्रयोग में लाना चाहिए। रेल मार्ग सीमित हैं और जब इन पर सवारी गाडि़यां दौड़ने लगती हैं तो माल ढुलाई में अनावश्यक विलंब होता है, जिसके कारण वे सारी चीजें ब्लाक हो जाती हैं जो रोजमर्रा की जरूरत की हैं। मसलन बिजली बनाने वाले पावर हाउसेज को कोयला नहीं मिल पाता। एक जगह से दूसरी जगह खाद्यान्न नहीं पहुंच पाते और इसका फायदा उन व्यापारियों को मिलता है जो भंडारण कर अपना घर भरते हैं। अगर सड़क मार्ग दुरुस्त और सुरक्षित कर दिए गए तो यकीनन एक नई शुरुआत होगी।


Comments Off on अब सुरक्षित सफर की हो बात
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 3.00 out of 5)
Loading...
Both comments and pings are currently closed.

Comments are closed.

Powered by : Mediology Software Pvt Ltd.