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सियासी चक्रव्यूह में घिरे मुलायम

Posted On May - 9 - 2014

आजमगढ़, 9 मई (भाषा)
सियासी लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल की चुनावी लड़ाई का केन्द्र भले ही नरेन्द्र मोदी की उम्मीदवारी वाले वाराणसी को माना जा रहा हो, लेकिन समाजवादी पार्टी प्रमुख एवं प्रत्याशी मुलायम सिंह यादव के जिताऊ ‘एम-वाई'(मुस्लिम-यादव) समीकरण को ध्वस्त करने के लिए प्रतिद्वंद्वियों की ओर से बिछाई गई गोटियों और उससे पैदा हुए जातीय समीकरणों की पेचीदगी ने आजमगढ़ सीट को पूर्वी अंचल की सबसे ‘हॉट सीट’बना दिया है। राजनीतिक प्रवेक्षकों के मुताबिक एम-वाई फैक्टर के सहारे ‘मोदी को रोकने के लिए’मैनपुरी के साथ-साथ आजमगढ़ से उतरे यादव के खिलाफ भाजपा और बसपा के प्रत्याशियों की पकड़ और इन दलों के नेताओं के ध्रुवीकरण की कोशिश से भरे बयानों ने ऐसा चक्रव्यूह रच दिया है कि उससे उबरने के लिए किसी अचूक ‘धोबीपछाड़’की जरूरत होगी।
 मुलायम की पेशानी पर बल   
बसपा और भाजपा के साथ त्रिकोणीय लड़ाई में सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव की जीत और हार का फैसला तो 16 मई को होगा लेकिन बसपा और भाजपा की घेराबंदी में जातीय समीकरण, मुजफ्फरनगर दंगों के बाद मुसलमानों के बीच पैदा हुई अविश्वास की खाई, स्वजातीय यादव समाज में आजमगढ़ के मौजूदा सांसद और प्रत्याशी रमाकांत यादव की गहरी सेंध और पूर्व विधायक सीपू हत्याकांड से क्षत्रिय समाज की नाराजगी ने मुलायम की पेशानी पर बल ला दिए हैं।
भाजपा-बसपा ने मारी बाजी   
सियासी जानकारों के अनुसार आजमगढ़ में धु्रवीकरण की कोशिश में भाजपा और बसपा बाजी मार ले गए हैं। भाजपा नेता अमित शाह का आजमगढ़ की रैली में विवादित भाषण में यह कहना कि आजमगढ़ आतंकवादियों का अड्डा है, के बाद मायावती का लखनऊ में प्रेस वार्ता में आजमगढ़ के भाजपा प्रत्याशी रमाकांत यादव को आतंकवादी बताना इसी कोशिश को दिखाता है।
 मौलाना भी बिगाड़ रहे खेल   
उलमा कौंसिल के प्रत्याशी मौलाना आमिर रशदी भी मुलायम का खेल बिगाड़ रहे हैं।  अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय टीचर्स एसोसिएशन का दल भी आजमगढ़ में डेरा डालकर मुसलमानों से मुलायम को हराने की पुरजोर अपील करके सपा मुखिया के लिए हालात को और विषम बना रहा है। आजमगढ़ में मुलायम सिंह यादव को पहली बड़ी चुनौती कभी उनके ही झंडाबरदार रहे आजमगढ़ के 4 बार के सांसद बाहुबली रमाकांत यादव दे  रहे हैं।

मुलायम तो हैं बाहरी: रमाकांत
रमाकांत के सपा छोडऩे के बाद लोकसभा  चुनाव में सपा कमजोर होती गई और पिछले 2 लोकसभा चुनाव में रमाकांत के मुकाबले सपा के कद्दावर मंत्री बलराम यादव और दुर्गा प्रसाद यादव तीसरे स्थान पर पहुंच गए थे।  रमाकांत यादव बिरादरी के बीच जाकर खुले तौर पर मुलायम को ललकार रहे हैं और कह रहे हैं कि सपा प्रमुख तो बाहरी हैं।
यहां भी पेंच: प्रतिद्वंद्वियों ने यादवों और मुसलमानों के जहन में इस बात को बैठाने की कोशिश की कि यादव आजमगढ़ की सीट छोड़ देंगे लिहाजा वे उनका समर्थन करके अपना वोट बेकार ना करें। हालांकि सपा महासचिव रामगोपाल यादव ने परसों यह कहकर स्थिति सम्भालने की कोशिश की कि सपा प्रमुख आजमगढ़ सीट नहीं छोड़ेंगे। अब देखना है कि यह प्रयास कितना रंग लाता है। यादव और मुस्लिम के बाद यहां 17 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले वाले सवर्ण मतदाता निर्णायक की भूमिका में हैं जिनमें से क्षत्रिय मतदाता सपा से नाराज बताया जाता है।


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