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बाहरी नेताओं को संसद तक पहुंचाया बिहार ने!

Posted On May - 8 - 2014

अतिथि देवो भव:

पटना : बिहार के लोगों ने..अतिथि देवो भव:..की उक्ति को सदा ही आत्मसात किया है और अपने राज्य में अन्य प्रांतों के लोगों को न सिर्फ जीवन यापन का मौका दिया,बल्कि अपनी आवाज बनाकर संसद तक भीपहुंचाया है।
बिहार ने सरोजनी नायडू जे.बी.कृपलानी, अशोक मेहता, मीनू मसानी, मधु लिमये, चन्द्रशेखर, मोहम्मद यूनुस सलीम, जार्ज फर्नांडीस और शरद यादव जैसे अन्य प्रांतों के नेताओं को राजनीतिक जमीन देकर यह साबित किया है कि उनके लिए अतिथि देवता हैं। बिहार के लोगों ने उन्हें लोकसभा में भेजते समय कभी उनके प्रांत नहीं पूछे और न ही कभी किसी के मन में यह संदेह रहा कि वे संसद में बिहार के हितों की बात करेंगे या नहीं।
जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव मध्यप्रदेश के है लेकिन उन्होंने बिहार को अपनी कर्मभूमि बना लिया है। वह वर्ष 1991 और 1996 तथा 1999 में मधेपुरा से लोकसभा के लिए चुने गये लेकिन 2004 के चुनाव में वह श्री लालू प्रसाद यादव से हार गये थे 1 इससे पूर्व 1998 के लोकसभा चुनाव में भी शरद यादव लालू प्रसाद यादव से पराजित हो गये थे लेकिन वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में श्री शरद यादव एक बार फिर राजद के रङ्क्षवद्र चरण यादव को पराजित कर संसद में पहुंचे।
आजादी से पहले हुए चुनाव में सरोजनी नायडू बिहार से चुनी गयी थीं। इसके बाद कांग्रेसी नेता जे.बी कृपलानी वर्ष 1953 में भागलपुर से उप चुनाव जीतकर लोकसभा के सदस्य बने थे। देश के प्रथम राष्ट्रपति के रूप में जब राजेन्द्र प्रसाद ने पद ग्रहण किया था तब उन्होंने अपने प्रांत  बिहार के किसी व्यक्ति को अपना सचिव नहीं बनाया बल्कि इसके लिए  उन्होंने आचार्य कृपलानी को ही चुना था।
दूसरे लोकसभा चुनाव में ही तत्कालीन प्रजा -सोशलिस्ट पार्टी ने महाराष्ट्र के अशोक मेहता को मुजफ्फरपुर से अपना उम्मीदवार बनाया था। इस चुनाव में उनके सामने किशोरी प्रसन्न ङ्क्षसह जैसे कद्दावर नेता के होने के बावजूद राज्य की जनता ने उन्हें भारी मतों से विजयी बनाया था।
इसके बाद 1962 में झारखंड पार्टी के समर्थन से तत्कालीन स्वतंत्र पार्टी के उम्मीदवार के रूप में मीनू मसानी रांची से लोकसभा के लिए चुने गये। उस समय भी बिहार में बाहरी उम्मीदवार को लेकर कोई चर्चा नहीं थी। इसके बाद केरल के रविन्द्र वर्मा 1977 में रांची से चुनाव जीतकर लोकसभा में पहुंचे और केन्द्र सरकार में श्रम मंत्री भी बने।
महाराष्ट्र के ही मूल निवासी मधु लिमये को भी बिहार के लोगों ने अपनाने में कोई हिचक नहीं दिखाई। मधु लिमये को दो बार मुंगेर और एक बार बांका से लोकसभा के लिए चुनकर भेजा।
महाराष्ट्र के ही मूल निवासी जार्ज फर्नांडीस को भी बिहार के लोगों ने वर्ष 1977, 1989, 1991, 1996, 1998, 1999 और 2004 में चुनकर लोकसभा में पहुंचाया। इसी तरह हैदराबाद के रहने वाले यूनुस सलीम 1991 में कटिहार से विजयी हुए थे लेकिन चुनाव जीतने के बाद वह कभी कटिहार नहीं आये।
समाजवादी नेता और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने भी 1991 में महाराजगंज से लोकसभा का चुनाव लड़ा और विजयी हुए लेकिन बाद में उन्होंने महाराजगंज की सीट छोड़ दी। (वार्ता)

बिहार में बाहरी
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