सिल्वर स्क्रीन !    हेलो हाॅलीवुड !    साहित्यिक सिनेमा से मोहभंग !    एक्यूट इंसेफेलाइिटस सिंड्रोम से बच्चों को बचाएं !    चैनल चर्चा !    बेदम न कर दे दमा !    दिल को दुरुस्त रखेंगे ये योग !    कंट्रोवर्सी !    दुबला पतला रहना पसंद !    हिंदी फीचर फिल्म : फर्ज़ !    

पहले भी कई जनरल उतरे हैं चुनावी जंग में

Posted On March - 3 - 2014

नयी दिल्ली, 3 मार्च (वार्ता)
जंग के मैदानों में सैन्य जनरलों का कितना ही शौर्यपूर्ण रिकार्ड या अनुभव रहा हो, लेकिन चुनावी अखाड़ों में उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा है। जनरल वी के सिंह सेना के ऐसे पहले जनरल नहीं है, जिन्होंने अपनी वर्दी उतारने के बाद राजनीतिक रंग दिखाया हो। उनसे पहले भी सैन्य जनरलों ने चुनावी दंगल में कदम रखा, लेकिन दुनिया के इस सबसे बड़े लोकतंत्र के मतदाताओं ने उन्हें नकार दिया। सैन्य एवं राजनीतिक मामलों के विशेषज्ञों ने याद दिलाया कि फील्ड मार्शल के एम करियप्पा जैसे पांच सितारा जनरल को चुनावी जंग में हार का सामना करना पड़ा था।
जनरल वीके ङ्क्षसंह ने सैन्य प्रमुख पद से मई 2012 में अवकाश ग्रहण किया था और उसके तुरंत बाद उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा दिखनी शुरू हो गई थी। इससे पहले सैन्य प्रमुख के रूप में अपने आखिरी एक साल के कार्यकाल में उन्होंने जन्मतिथि के विवाद को लेकर विभिन्न मोर्चों पर सरकार से जंग लड़ी और मामले को वह कानून के सर्वोच्च अखाड़े में भी ले गए और वहां से भी उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा था।
जनरल सिंह ने पहले भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में टीम केजरीवाल के मंच पर कदम रखा और बाद में वह अन्ना हजारे के साथ थे। हरियाणा में पूर्व सैनिकों की एक रैली में वह भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के साथ एक मंच पर दिखाई दिए थे, जबकि एक समय उन्हें इंडियन नेशनल लोकदल के खेमे में भी देखा गया था। आखिरकार अपने विकल्पों को गहराई से तोलने के बाद पिछले सप्ताह भाजपा में पूर्व सैनिकों के दलबल के साथ उन्होंने प्रवेश कर लिया।
सेना से अवकाश ग्रहण करने के बाद लेफ्टिनेंट जनरल नाथू सिंह ने भी राजस्थान से ही चुनाव लड़ा था। वह स्वतंत्र पार्टी से भीलवाड़ा में उम्मीदवार बने थे, लेकिन वहां उन्हें कांग्रेस के उम्मीदवार ने परास्त कर दिया था।
फील्ड मार्शल करियप्पा ने 1971 में राजनीति के समर में कदम रखा। उन्होंने बम्बई से चुनाव लड़ा था लेकिन उनके सामने पूर्व रक्षा मंत्री कृष्ण मेनन और आचार्य कृपलानी जैसे चोटी के उम्मीदवार थे। इस भीषण चुनाव संग्राम में फील्ड मार्शल करियप्पा को हार का सामना करना पड़ा और कृष्ण मेनन चुनाव जीत गए थे।
पूर्व जनरलों में एक और सैन्य अधिकारी जनरल शंकर राय चौधरी ने राजनीति में प्रवेश किया लेकिन उन्होंने राज्यसभा का सुरक्षित रास्ता अपनाया। उन्हें पश्चिम बंगाल की माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार ने बतौर निर्दलीय उम्मीदवार राज्यसभा में भेजा था।


Comments Off on पहले भी कई जनरल उतरे हैं चुनावी जंग में
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
Both comments and pings are currently closed.

Comments are closed.

Powered by : Mediology Software Pvt Ltd.