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नीचा नगर की ‘बिराज बहू’ कामिनी कौशल

Posted On October - 19 - 2013

भीम राज गर्ग

संभ्रांत परिवारों से आई अभिनेत्रियों दुर्गा खोटे, लीला चिटणिस, शोभना समर्थ, वनमाला, नलिनी जयवंत और शांता आप्टे आदि ने पारिवारिक एवं सामाजिक विरोध के बाबजूद सिनेमा की दुनिया में कदम रखे थे और शोहरत की बुलंदियों को चूमा था। इन्हीं अभिनेत्रियों की परंपरा को आगे बढ़ाया कामिनी कौशल ने, जो लाहौर के एक संभ्रांत परिवार से आयी थी। उसने अपनी अभिनय प्रतिभा और सौम्य आचरण द्वारा न केवल फिल्म निर्माताओं/निर्देशकों/सह-कलाकारों बल्कि दर्शकों का भी अपार स्नेह अर्जित किया था। कामिनी कौशल ने अपने लंबे फिल्मी कॅरिअर के दौरान बहुत-सी अविस्मरणीय भूमिकाएं निभाई हैं। परंतु उन्हें पहली फिल्म नीचा नगर और 1955 में प्रदर्शित फिल्म बिराज बहू के लिए विशेष तौर पर याद किया जाता है।
कामिनी कौशल का वास्तविक नाम उमा कश्यप था। उसका जन्म 16 जनवरी, 1927 को लाहौर के चौबुर्जी इलाके में हुआ था। कामिनी के पिता प्रोफेसर शिवराम कश्यप अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वनस्पति-शास्त्री थे। कामिनी घर में सबसे छोटी थी, उसके दो भाई और दो बहनें थीं। उसके बड़े भाई डॉक्टर केएन कश्यप एक मशहूर सर्जन थे जबकि छोटे भाई कर्नल एएन कश्यप को दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान जापान में युद्धबंदी बना लिया गया था। कामिनी ने लेडी मैक्कलैगन हाईस्कूल से प्रारंभिक शिक्षा ली और किन्नेयर्ड कॉलेज से अंग्रेजी में बीए ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की है। कामिनी कौशल ने अपनी बहन की असामयिक मृत्यु के पश्चात, अपने जीजा ब्रह्मस्वरूप सूद से 1947 में विवाह कर लिया था। ब्रह्मस्वरूप सूद पोर्ट ट्रस्ट में एक इंजीनियर थे और उन्होंने कामिनी को फिल्मों में काम करने के लिए उत्साहित किया था। कामिनी की दो बेटियां और तीन बेटे हैं।
कामिनी कौशल ने गुरु टी. महालिंगम पिल्लई से भरतनाट्यम नृत्य सीखा था। उसे बचपन से रेडियो नाटकों में भाग लेने का शौक था। वह लाहौर में रेडियो और रंगमंच कार्यक्रमों में भाग लिया करती थीं। कामिनी कौशल ने 1946 में चेतन आनंद की फिल्म ‘नीचा नगर’ से अपने फिल्मी करिअर की शुरुआत की थी। फिल्म निर्माता/निर्देशक चेतन आनन्द अपनी पहली फिल्म नीचा नगर के लिए नए कलाकारों की तलाश में थे। एक बार उन्होंने कामिनी कौशल के रेडियो नाटक को सुना तो उसे अपनी नई फिल्म की नायिका के रोल का ऑफर दिया।
कामिनी उस समय कॉलेज की पढ़ाई कर रही थी और उनका परिवार भी फिल्म-करिअर को अच्छा नहीं समझता था। इसलिए उसने चेतन आनंद की इस ऑफर को अस्वीकार कर दिया था। लेकिन मुंबई में जब चेतन आनंद ने एक बार फिर उसे अपनी फिल्म में काम करने का आग्रह किया तो कामिनी कौशल ने अपने बड़े भाई के अनुरोध पर इस फिल्म में काम करने की स्वीकृति दे दी। चेतन आनंद ने कामिनी कौशल को उसके असली नाम उमा कश्यप के बजाय फिल्मी नाम कामिनी कौशल दे दिया था। फिल्म में उमा आनंद के अतिरिक्त उसके कॉलेज के मित्र रफीक अहमद और रेडियो सहकर्मी इम्तियाज अली भी काम कर रहे थे, फिल्म का पूरा वातावरण परिवार जैसा लग रहा था।
प्रथम कांस फिल्म समारोह में नीचा नगर को विदेशी श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ फिल्म का गोल्डन पाम पुरस्कार प्रदान किया गया था। फिल्म में कामिनी के अभिनय की भूरि-भूरि प्रशंसा हुई थी और उसे कई फिल्मों में अभिनय करने के प्रस्ताव मिले थे। लेकिन वह सभी प्रस्ताव ठुकराकर वापस लाहौर लौट गयी थी। कामिनी कौशल ने एक साक्षात्कार में बताया था कि वह प्रभात फिल्म कंपनी की गजानन जागीरदार निर्देशित फिल्म रामशास्त्री से बेहद प्रभावित हुई थी, इसीलिए जब गजानन जागीरदार ने फिल्म जेलयात्रा के लिए उससे संपर्क किया तो वह फिल्मों में अभिनय करने हेतु मुंबई लौट आई थी। फिल्म जेलयात्रा में कामिनी कौशल के नायक राजकपूर थे, जिन्होंने उसे अपनी प्रथम फिल्म आग (1948) में एक महत्वपूर्ण भूमिका करने का अवसर दिया था। उनको लक्स का खूबसूरत चेहरा चुने जाने का गौरव भी प्राप्त हुआ था। इसके बाद कामिनी की जिंदगी ने एक नया मोड़ ले लिया था और वह हिट फिल्में जिद्दी, शहीद और शबनम आदि की हीरोइन बन गयी थी।
उन्होंने अपने समय के सभी जाने-माने अभिनेताओं अशोक कुमार, दिलीप कुमार और राजकपूर आदि के साथ काम किया था।  कामिनी कौशल ने नमूना, शायर, आरजू, बिखरे मोती, पूनम, आंसू, आस, शहंशाह, बिराज बहू, चालीस बाबा एक चोर, संगम, आबरू, बड़ा भाई, बड़े सरकार, जेलर, नाइट क्लब और बैंक मैनेजर जैसी चर्चित फिल्मों में मुख्य भूमिकाएं निभाईं थीं। कामिनी कौशल फिल्म बैंक मैनेजर में अभिनय करने के पश्चात घरेलू कारणों से कुछ वर्षों के लिए फिल्मी दुनिया से दूर चली गयी थी। वे पांच साल बाद फिल्म गोदान (1963) से सिल्वर स्क्रीन पर वापस लौटी और बतौर नायिका यह उनकी अन्तिम प्रदर्शित फिल्म थी। हिन्दी फिल्मों में मुख्य भूमिकाएं निभाने के पश्चात, कामिनी कौशल फिल्म शहीद में मनोज कुमार की मां की सशक्त भूमिका में सिल्वर स्क्रीन पर नजर आयी थी।  चरित्र अभिनेत्री के रूप में कामिनी की चर्चित फिल्मों में भीगी रात, उपकार,  वारिस, विश्वास,पूरब और पश्चिम, हीर रांझा, धरती, उपहार, शोर,  रोटी कपड़ा और मकान, संन्यासी, दस नंबरी,स्वर्ग नरकऔर हमशकल आदि के नाम शामिल हैं।
1980 में कामिनी कौशल ने फिल्मों से संन्यास ले लिया  था और छोटे पर्दे पर अभिनय और निर्देशन की पारी शुरू की थी। कामिनी ने वक्त की रफ्तार, ऊपरवाली घरवाली, संजीवनी, शन्नो की शादी और अंग्रेजी धारावाहिक ज्वैल इन द क्राऊन जैसे टेलीविजन धारावाहिकों में अभिनय किया है। हाल ही के वर्षों में कामिनी ने हर दिल जो प्यार करेगा, चोरी चोरी, हवाएं, लागा चुनरी में दाग और चेन्नई एक्सप्रेस (2013) फिल्मों में अभिनय किया है।
कामिनी कौशल ने फिल्म निर्माण में भी कदम बढ़ाये थे और अपनी फिल्म कंपनी के. आट्र्स के बैनर तले दो फिल्मों पूनम और चालीस बाबा एक चोर का निर्माण किया था। उन्हें फिल्म बिराज बहू के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्म फेयर पुरस्कार प्रदान किया गया था। इस वर्ष वे  फिल्म चेन्नई एक्सप्रेस में शाहरुख खान की दादी की भूमिका में सिल्वर स्क्रीन पर नजर आई हैं।
सिल्वर स्क्रीन पर दिलीप कुमार-कामिनी कौशल की जोड़ी ने कुछ रोमांटिक फिल्मों नदिया के पार, शहीद, शबनम, आरजू में अभिनय किया था। दर्शकों को इन फिल्मों के प्रणय दृश्य देखकर इनके बीच परस्पर प्रेम का अहसास हो जाता था। फिल्म नदिया के पार के समय उन दोनों के बीच प्यार पनपा था। दिलीप और कामिनी ने अपने प्रेम को सार्वजनिक तौर पर कभी प्रकट नहीं किया।
कामिनी को पढऩे-लिखने, गुड्डे-गुडिय़ा और कठपुतलियां बनाने का शौ$क  है। कामिनी कौशल को बच्चों से बेहद लगाव रहा है। वह बच्चों की पत्रिका पराग में नियमित रूप से कहानियां लिखती थीं। 1980 के दशक में उसने उन कहानियों पर आधारित चांद-सितारे नाम से एक धारावाहिक बनाया था। 1986 में कौशल ने एक एनीमेशन फिल्म मेरी परी भी बनाई थी। वह बच्चों के लिए कठपुतली-नाटकों का मंचन भी करती रहती है। कामिनी कौशल आज भी पर्दे पर दिखना चाहती हैं।


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