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पाकिस्तानी अहमदिया जमात की पहली पसंद भारत

Posted On December - 31 - 2012

मनन सैनी
गुरदासपुर, 31 दिसंबर। पाकिस्तान में बढ़ रही आतंकी गतिविधियों से डर तथा अहमदिया समुदाय के लोगों को मुस्लिम न मानने से दुखी अहमदिया दूसरे देशों में जाकर बसने को मजबूर है। दूसरे देशों में जाकर बसने वाले देशों में उनकी पहली पसंद भारत है। जिसका मुख्य कारण भारत का धर्म निरपेक्ष, लोकतंत्र तथा दुनिया के दूसरे देशों से ज्यादा सुरक्षित होना है। यह बातें कादियां में अहमदिया जमात के तीन दिवसीय जलसे में पाकिस्तान से भाग लेने आए जमात के लोगों ने विशेष भेंट के दौरान कही। पाकिस्तानी अहमदियों ने भारत सरकार से अपील करते हुए कहा कि हमारी जमात के लोगों को वीजा देने तथा यहां नागरिकता प्रदान करने हेतु अपने नियमों में ढील दे। रसूर अहमद, अशफाक अहमद ने बताया कि पाकिस्तान में कई ऐसी अहमदिया लड़कियां है जो भारत में शादी करना चाहती है, परन्तु भारत में नागरिकता आसानी से न मिल सकने से उनका ख्वाब अधूरा ही है।
संवाददाता से विशेश बातचीत के दौरान पाकिस्तान के लियाकत, अशफाक अहमद ने बताया कि पाकिस्तान में किसी भी अन्य धर्म को मानने की कोई आजादी नहीं है। वहां की सरकारों ने 1974 के बाद से अहमदिया जमात के लोगों को अपना धर्म मानने की आजादी नहीं दी। हम अहमदिया लोगों को पाकिस्तान में गैर मुसलमान करार दिया जाता है और हमें मस्जिदों के अंदर तक जाने की इजाजत नही दी जाती। यहां तक कि हमें नमाज या अजान देने तक की मनाही है। जब उनसे पूछा गया कि वे भारत में अपनी जमात के पवित्र स्थल कादियां में आकर कैसा महसूस कर रहे हैं?  उन्होंने कहा कि इस बात का जबाव देने में वह असमर्थ है क्योकि उनके पास कोई शब्द नही है। उत्तर इस अंदाज में दिया कि अगर जन्नत है कि तो वह यहीं है यहीं है।
कुछ पाकिस्तानियों ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि पाकिस्तान में सरकार बस नाम की ही है। असल सत्ता तो धार्मिक कट्टरपंथियों के हाथ में है। फतवां जारी करते है जिन्हे वहां की जिला और पुलिस प्रशासन लागू करवाती है।
एक घटना संबधी उन्होंने बताया कि एक बार जिला झंग में एक धार्मिक समारोह का आयोजन किया गया था। जिसमें नाट शरीफ के मुकाबले करवाए गए। समुदाय की लड़की जोकि रबवां शहर की थी ने इन मुकाबलों में हिस्सा लिया और नाट शरीफ उच्चारण में पहले पांच स्थान में आई। बड़े राजनितिक  दिग्गज्ञों ने लड़की को सराहा और उसे पुरस्कार भी दिया। परन्तु जब इस बात का पता धार्मिक कट्टरपंथियों को लगा तो उन्होंने यह कहते हुए कि अहमदिया मुस्लिम नहीं है तो वह नाट शरीफ नही गा सकते, लड़की के परिवारजनों को तंग करवाना शुरु कर दिया। ‘हम लोग छुप कर अपने धर्म की पूजा करते है।’ जमात के उच्च लोगो ने कई बार इस संबधी यूएन तक को दखल देने के लिए कहा परन्तु कुछ नहीं हुआ। इसलिए अब हमारे पास दूसरे देशों को पलायन करने के सिवाए कोई रास्ता नही है।
इस मौके पर प्रैस कमेटी के प्रधान सईद तनवीर अहमद ने बताया कि पहला जलसा 1891 में कादियां में ही किया गया था जिसमें मात्र 75 लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई थी। परन्तु 121 वें जलसा सम्मेलन में 32 देशों से 20 हजार से ज्यादा लोगों ने इस सम्मेलन में शिरकत की है।
तीन दिवसीय इस जलसे से कादियां शहर के लोग बेहद खुश दिखे, जिनमें खासकर दुकानदार थे। दुकानदार कृष्ण अहमद तथा स्थानीय निवासी संजीव सूरी ने बताया कि जलसा स्थानीय लोगों के लिए वरदान साबित होता है। इस जलसे में आए लोग जमकर खरीदारी करते हैं जिससे स्थानीय लोगो को मुनाफा होता है। इस बार के जलसे में पाकिस्तान के बुर्के, टोपियां और डिनर सैट ग्राहकों के आकर्षण का केंद्र बने रहे जो पाकिस्तान के लोग अपने साथ लेकर आए थे।


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