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इन गर्मियों में रानीखेत घूमा जाए

Posted On May - 16 - 2012

 विनय भटनागर
रानीखेत नैनीताल से सिर्फ 60 किलोमीटर की दूरी पर बसा छोटा-सा पहाड़ी शहर अपने शांत वातावरण, खुशबूदार आबोहवा और मनभावन दृश्यों के लिए प्रसिद्ध है। इसीलिए यहां आने वाले ज्यादातर पर्यटक सिर्फ घूमने नहीं, बल्कि कुछ समय रहने के लिए आते हैं। अगर आप भी परिवार के साथ फुर्सत के दो-चार दिन बिताने का मन बना रहे हैं तो रानीखेत का रुख कर सकते हैं।
रानीखेत पहुंचकर पर्यटन का मस्ती भरा मूड चेंज हो जाता है। वजह है यहां की शांति, जो यहां के चप्पे-चप्पे में कुछ इस कदर समाई है कि महानगरों से आने वाले पर्यटक तो यहां रहने वाले लोगों की धीमी रफ्तार जीवनशैली को लेकर अचरज भी जता सकते हैं। पर कुछ ही देर में यह शांति जब आपकी सांसों से होकर मन-मस्तिष्क में समाती है तो लगता है कि हां, यही तो वह जगह है, जहां आने के लिए मन बरसों से भटक रहा था। इसलिए जब रानीखेत में आइए तो कुछ देखने से ज्यादा बहुत कुछ महसूस करने की इच्छा को मन में रखिए। यकीनन आप निराश नहीं होंगे।
ऐसा कहा जाता है कि कुमाऊं अंचल के महाराजा सुधरदेव की रानी पद्मिनी को यह जगह इतनी भायी थी कि उन्होंने यहां पर अकसर आना शुरू कर दिया था। शायद इसीलिए समुद्र तल से 1869 मीटर की ऊंचाई पर बसी इस जगह का नाम रानीखेत पड़ा। ब्रिटिश फौजी अफसरों को भी यहां की आबोहवा खासी रास आई और उन्होंने कुमाऊं रेजिमेंट सेंटर का मुख्यालय ही यहां स्थापित कर डाला। आज भी यहां हर ओर सेना के दफ्तर और जवान ही नजर आते हैं।

कहां घूमें

रानीखेत में देखने, घूमने और मन में समाने लायक बहुत कुछ है। लेकिन ये सारी जगहें आप थोड़ी देर में घूम सकते हैं। यह बात दीगर है कि एक बार इन जगहों से लौटने के बाद इन्हें फिर से देखने का मन करता है। कुछ प्रमुख जगह हैं—

गोल्फ कोर्स

उपट कालिका के नाम से जाना जाने वाला यहां का गोल्फ कोर्स रानीखेत का सबसे बड़ा आकर्षक है। चीड़ और देवदार के घने वक्षों से घिरे इस लंबे-चौड़े शांत मैदान की चुप्पी तभी टूटती है, जब सैलानियों से भरी बसें यहां आकर रुकती हैं। यहां पास ही प्राचीन काली-दुर्गा का मंदिर भी है।

चौबटिया गार्डन

काफी लंबा-चौड़ा यह पार्क असल में फलों से जुड़ी रिसर्च का एक सरकारी केंद्र है। सेब, अखरोट, खुबानी जैसे ढेरों फलों के पेड़ हैं। आप चाहें तो खुद घूम लीजिए या फिर यहां मौजूद गाइड की सेवाएं लेकर सौ से तीन सौ रुपये में आधे से दो घंटे तक की जंगल-वॉक भी कर सकते हैं, जिसमें वह आपको यहां के पेड़-पौधों, अनोखी वनस्पतियों और पक्षियों आदि के बारे में भी रोचक जानकारी देगा।

झूला देवी मंदिर राम मंदिर

रानीखेत का प्रमुख आकर्षण है यहां ‘घंटियों वाला मंदिर’। मां दुर्गा के इस छोटे-से-शांत मंदिरों में श्रद्धालु मन्नत पूरी होने पर छोटी-बड़ी घंटियां चढ़ाते हैं।

केआरसी म्यूजियम

कुमाऊं रेजिमेंट सेंटर की गौरवगाथा बयान करते केआरसी म्यूजियम  और केआरसी कम्युनिटी सेंटर में स्थित शॉल फैक्टरी में महिलाओं को हथकरघे पर शालें बुनते हुए देखना एक यादगार अनुभव हो सकता है।

भालू डैम

चौबटिया से तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह जगह मछली पकडऩे के लिए प्रसिद्ध है।

बिनसर महादेव

रानीखेत से कार्बेट के रास्ते पर कोई 18 किलोमीटर दूर देवदार के घने जंगल में स्थित इस भव्य मंदिर के देखे बिना यहां की यात्रा का आनंद पूरा नहीं हो सकता।

हेड़ा खान मंदिर

रानीखेत से करीब चार किलोमीटर दूर चिलियानौला से संत हेड़ा खान का यहां शांत आश्रम पर्यटकों को इसलिए भी लुभाता है, क्योंकि यहां से विशाल हिमालय रेंज साफ देखी जा सकती है। नंदा देवी पर्वत तो यहां से ठीक सामने नजर आता है।

कहां ठहरें?

यों तो यह शहर काफी छोटा है, मगर यहां पर हर बजट के होटल मौजूद हैं। यहां के कई होटलों के कमरों में किचन भी होते हैं। काफी लंबे समय तक रहने के इरादे से आने वाले पर्यटक अपना खाना खुद भी बना सकते हैं। कुमाऊं विकास निगम के भी यहां पर कई पर्यटक आवासगृह हैं। वैसे थोड़ा-सा ज्यादा पैसा खर्च कर अगर चिलियानौला स्थित हिमाद्रि पर्यटक आवासगृह में ठहरें तो सुबह-कुदरत के खूबसूरत नजारे काफी करीब से देख पाएंगे।

क्या खरीदें

चौबटिया गार्डन में पैदा होने वाले फल और उन्हीं से तैयार जैम, शर्बत आदि वहीं स्थित दुकान से खरीदे जा सकते हैं।  वैसे पहाड़ी फलों से तैयार ये चीजें यहां दूसरी कई जगहों पर भी मिलती हैं। ऊनी कपड़े, शॉल आदि भी यहां से ले सकते हैं। केआरसी कम्युनिटी सेंटर में स्थित शॉल फैक्टरी से वहीं की बुनी हुई शॉलें तैयार कोट, ओवरकोट ली जा सकती हैं।

कुछ खास बातें

रानीखेत चूंकि मिलिटेरी क्षेत्र है, इसलिए यहां चेकिंग वगैरह काफी होती है। बेहतर होगा अपना कोई फोटो पहचान-पत्र साथ लेकर चलें। यहां का बाजार काफी जल्दी बंद हो जाता है, सो शाम को शॉपिंग, खाना आदि जल्दी निबटा लें और अंधेरा होने के बाद बाहर न निकलें।

कब जाएं?

यों तो आप यहां सालभर जा सकते हैं, क्योंकि हर मौसम में यहां की छटा अलग ही नजर आती है, लेकिन ज्यादातर लोग यहां गर्मियों में आना पसंद करते हैं। मई-जून में भी यहां शाम को हल्की ठंड होती है, सो जब भी यहां आएं अपने गर्म कपड़े लाना न भूलें।

कैसे पहुंचे

नजदीकी एयरपोर्ट पंतनगर है, जो रानीखेत से 120 किलोमीटर दूर है। रेल से जाना चाहें तो नजदीकी रेलवे स्टेशन काठगोदाम है, जो यहां से 80 किलोमीटर की दूरी पर है और दिल्ली समेत कई बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है। काठगोदाम से रानीखेत के लिए बस, टैक्सी आदि मिल जाती हैं। सड़क मार्ग से रानीखेत की दिल्ली से दूरी 350 किलोमीटर है, जिसे बस या टैक्सी द्वारा बड़े आराम से नौ दस घंटे में तय किया जा सकता है। आप चाहें तो रुद्रपुर, हलद्वानी के रास्ते टूर ऑपरेटर से नैनीताल, रानीखेत, कार्बेट का पैकेज एकसाथ ले सकते हैं।


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