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अब व्यवस्था परिवर्तन अभियान में जुटा आर्य समाज

Posted On May - 17 - 2012

अरुण नैथानी

स्वामी सुमेधानंद सरस्वती

चंडीगढ़, 17 मई। आज़ादी की लड़ाई व सामाजिक बदलावों में निर्णायक भूमिका निभाने वाला आर्य समाज बदले हालात में अन्ना व रामदेव की तर्ज पर जनांदोलन चलाने की तैयारी में जुट गया है। लेकिन आर्य समाज का मानना है कि इस आंदोलन की शुरुआत जंतर-मंतर और रामलीला मैदान के बजाय संसद के भीतर जाकर होगी जिसके लिए हमें योग्य, चरित्रवान तथा अच्छी छवि वाले लोगों को चुनना होगा। फिर अच्छे व प्रभावी कानून बनाकर राष्ट्र को मजबूत बनाया जा सकता है।
देशभर में चलाये जा रहे ‘राष्ट्र रक्षा सम्मेलन’ के क्रम में चंडीगढ़ में होने वाले सम्मेलन में भाग लेने आये सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा, नई दिल्ली की संचालन समिति के अध्यक्ष स्वामी सुमेधानंद सरस्वती ने दैनिक ट्रिब्यून से बातचीत में इस आंदोलन की आवश्यकता पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि देश कानून से चलता है और कानून जंतर-मंतर व रामलीला मैदान के बजाय संसद में ही बनेंगे। इसलिए हमारी कोशिश है कि योग्य प्रतिनिधि को चुनकर संसद में भेजा जाये। वे बताते हैं कि व्यवस्था में परिवर्तन के लिए चलाये जा रहे आंदोलन सही दिशा में नहीं हैं। लोकपाल बिल बनाने मात्र से समस्या का हल नहीं होगा क्योंकि उसका क्रियान्वयन करने वाले वही लोग हैं जिन पर उंगलियां उठती हैं।
स्वामी सुमेधानंद सरस्वती बताते हैं कि इस अभियान को अमलीजामा पहनाने के लिए देशव्यापी जनजागरण अभियान चलाया जायेगा। आर्य समाज के प्रकांड विद्वान आंदोलन की रूपरेखा तैयार करने के लिए जगह-जगह सम्मेलन कर रहे हैं। दिल्ली में सम्मेलन के बाद आगामी रविवार 20 मई को केबीडीएवी स्कूल, सेक्टर सात, चंडीगढ़ में होने वाले सम्मेलन में हरियाणा, पंजाब, हिमाचल व चंडीगढ़ के प्रतिनिधि भाग लेकर विचार मंथन करेंगे। इसके उपरांत मध्य जून में बागेश्वर (उत्तराखंड) में सम्मेलन आयोजित किया जायेगा।
एक सवाल के जवाब में स्वामी सुमेधानंद स्वीकारते हैं कि आज़ादी के आंदोलन में निर्णायक भूमिका निभाने के बाद आर्यसमाजी शिक्षा के उन्नयन में जुट गये और राजनीतिक आंदोलनों से दूर हो गये। ये हमारी भूल थी जिसको सुधारा जायेगा। लेकिन शैक्षिक क्रांति में आर्य समाज के योगदान को नकारा नहीं जा सकता। आज यदि दलित परिवार की मायावती देश के सबसे बड़े प्रांत की मुख्यमंत्री बनी तो इसमें शैक्षिक आंदोलन की महत्वपूर्ण भूमिका थी। लेकिन आज देश तमाम चुनौतियों से रूबरू है। देश की रक्षा नीति, विदेश नीति, कृषि नीति तथा राजनीति विफल नजर आती है। हमारे पड़ोसी भारत-विरोधी अभियान चला रहे हैं। चीन-पाक अघोषित युद्ध चला रहे हैं। नेपाल व बंगलादेश भी हमारे शुभचिंतक नहीं हैं। खानपान की वस्तुओं में मिलावट चरम पर है। दूध के नाम पर बच्चों को ज़हर पिला रहे हैं। मिलावट की तमाम खबरों के बावजूद सरकार मिलावटखोरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। सेना में बढ़ती अनुशासनहीनता विचलित करने वाली है।
स्वामी जी मानते हैं कि ये वक्त हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई तथा कांग्रेस, भाजपा व वाम दर्शन में बंटने का नहीं, देश की अस्मिता की रक्षा करने का है। देश के सत्ताधीशों से पूछा जाना चाहिए सुप्रीम कोर्ट की अवहेलना करके संसद के हमलावर अफजल गुरु व मुंबई  हमले के दोषी अजमल कसाब की आवभगत क्यों की जा रही है जबकि उन्हें तत्काल फांसी मिलनी चाहिए। वास्तव में आज के हालात में आई समाज के आंदोलन को मीडिया द्वारा जन-जन तक पहुंचाने में मदद करनी चाहिए। आर्य समाज देश की अस्मिता के प्रतीकों की गरिमा बनाये रखने को देशव्यापी मुहिम चलायेगा। यदि जनता अच्छे व प्रगतिशील सोच के ईमानदार लोगों को संसद में भेजेगी तो तमाम समस्याएं स्वत: खत्म होने लगेंगी। तभी देश के हित में उपयोगी कानून बनेंगे और उनके बेहतर ढंग से अनुपालन से समस्याओं का निराकरण हो पायेगा।


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