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देखो मैंने देखा इक सपना

Posted On February - 27 - 2011

रेखा

गणेश आचार्य की फिल्म ‘एंजल’ के साथ एक और नए चेहरे ने हिंदी फिल्मों में दस्तक दी है। ये हैं मदालसा शर्मा, जो साउथ की कुछ फिल्मों में छोटे-मोटे रोल कर चुकी हैं। ‘एंजल’ में उन्होंने सोनल नाम की एक ऐसी लड़की का रोल किया है, जो पैरेलिसिस से पीडि़त है। अपने किरदार की चर्चा करते हुए मदालसा कहती हैं, ‘सोनल न ठीक से बोल पाती है और न हाथ-पांव हिला पाती है। लेकिन उसके अपने सपने हैं, वह ब्याह रचाना चाहती है। प्यार को महसूस करना चाहती है। तभी उसे एक लड़का मिलता है, जो उसकी जिंदगी को बदल डालता है। यह निराशा के बीच सपनों के सतरंगी फूल खिलाने वाली फिल्म है।’
इस फिल्म में एक मौन चरित्र को रंग देना उनके लिए कितना चुनौती भरा था? यह पूछने पर वे कहती हैं, ‘फिल्म के दौरान मैं नहीं बोलती, मेरी आंखें और इशारे बोलते हैं। मैंने इसके लिए खूब मेहनत की, ताकि कुछ भी बनावटी नहीं लगे। हमने एक महीने की वर्कशॉप की। मैं नानावटी अस्तपाल जाकर पैरेलिसिस के मरीजों से मिली, ताकि मैं किरदार के भीतर समा सकूं।’
मदालसा शर्मा की मां शीला शर्मा बड़े और छोटे परदे का जाना-माना चेहरा है, लगता है उनसे ही मदालसा को एक्टिंग की प्रेरणा मिली? स्वीकार करते हुए वे कहती हैं, ‘हां, उनसे मैंने काफी कुछ सीखा। वे लंबे समय से फिल्में कर रही हैं। वे राजश्री की ‘नदिया के पार’ में थीं और उन्होंने कई फिल्में की। ‘महाभारत’ में भी वे थीं। इसलिए मुझे एक्टिंग का रुझान बचपन से ही था। मैं अकसर उनके साथ सैट पर जाती थी।’ हमने सुना है कि मदालसा ने ‘प्लेयर्स’ में सोनम वाले रोल को अस्वीकार कर दिया और ‘एंजल’ कर ली। क्या यह सच है? ‘नहीं, यह सच नहीं है,’ वे तुरंत जवाब देती हैं,’दरअसल अब्बास-मस्तान तो मुझे तब ही हीरोइन बनाना चाहते थे, जब मैं दसवीं में पढ़ रही थी। यह पांच साल पहले की बात है। यह फिल्म फ्लोर पर आने से पहले ही डिब्बाबंद हो गई क्योंकि ’36 चाइना टाऊन’ और ‘नकाब’ के फ्लॉप होने के कारण वह टल गई थी। आगे चल कर वह फिल्म बनी ही नहीं। मुझे इस फिल्म का नाम का भी नहीं पता। अब्बास-मस्तान ने कहा था कि अभी तुम इंतजार करो, हम फिर साथ काम करेंगे। इस दौरान मैंने साउथ की फिल्मों में काम किया। जब ‘एंजल’ का प्रस्ताव आया, तो मैंने बाकायदा अब्बासजी से इसके लिए इजाजत ली थी।’
क्या साउथ की फिल्मों में काम करना उनके लिए ट्रेनिंग की तरह रहा? ‘हां, साउथ में काम करके मुझे ट्रेनिंग खूब मिली। अब तकनीक और कैमरे से दोस्ती हो गई है। तमिल, तेलुगू और कन्नड़ की कुछ फिल्मों में मैंने काम किया है। मेरी पिछली तेलुगू फिल्म, ‘अलास्यम अमरुथाम’ को रामा नायडू सुरेश प्रोडक्शंस ने बनाया है। यह दक्षिण का नामचीन बैनर है, फिल्म भी हिट रही थी।’


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