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तेनाली राम के किस्से

Posted On February - 27 - 2011

हरा हंस

कृष्णदेव को अलग-अलग रूप- रंगों के पक्षी अपने राजकीय बाग में रखने का शौक था। इसी बात का फायदा कई बार चतुर लोग उठाया करते थे। वे छोटी-मोटी दुर्लभ पक्षियों की प्रजातियां राजा को भेंट करते और भारी- भरकम राशि इनाम में ले लेते।
एक बार एक आदमी दरबार में हरे रंग के हंस के साथ पेश हुआ। उसने राजा को कहा- ‘महाराज आप जानते हैं हंस  हमेशा सफेद रंग के होते हैं। मगर मेरे  सेवकों ने बड़ी दूर जंगलों की खाक छानकर एक निर्जन सरोवर से हरे रंग के इस हंस को पकड़ा है। इसे मैं आपके शाही बाग के लिए लाया हूं।’ राजा ने खुश होकर उस आदमी को मोर की कीमत बीस हजार स्वर्ण मुद्राएं और दस हजार पुरस्कार के तौर पर राजकोष से दिला दिए। राजा की इस फिजूलखर्ची पर वित्तमंत्री ने तेनालीराम से चिंता प्रकट की।
अगले दिन तेनाली  चार हरे हंसों के साथ दरबार में उपस्थित हुआ। यह देखकर कृष्णदेव बहुत खुश हुए। उन्होंने तेनाली को एक लाख  स्वर्ण मुद्राएं देने के आदेश दिए। तेनाली ने कहा—’नहीं महाराज, ये कमाल तो इस मूर्तियां रंगने वाले हरे रंग का है जिसे मात्र 5 स्वर्ण मुद्राओं में खरीदकर सफेद हंसों को रंगा गया है। भला एक लाख में तो सारे राज्य के घर-आंगन पर नया रंग-रोगन हो जाए।’ राजा समझ गया कि उस इनसान ने  केवल ठगी करके इनाम लिया है। तब उसे पचास हजार रुपये राजकोष में जमा कराने को कहा गया। वित्तमंत्री तेनाली की चतुराई से बेहद खुश हुआ।

प्रस्तुति: अनिल वर्मा


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