पायलट को हटाए जाने के बाद प्रियंका ने की सोनिया से मुलाकात !    सुप्रीमकोर्ट का उम्रकैद की सजा भुगत रहे बाबा रामपाल को पैरोल से इनकार !    खराब मौसम के कारण यूएई का पहला मंगल अभियान शुक्रवार तक स्थगित !    राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिये खुद को करें नामांकित : निशंक !    सत्य को परेशान किया जा सकता है पराजित नहीं : पायलट !    विधायक की मौत को लेकर उत्तरी बंगाल में भाजपा का बंद !    राजस्थान : सचिन पायलट से छीना उप-मुख्यमंत्री पद, 2 मंत्रियों की भी छुट्टी! !    एक अगस्त तक खाली कर दूंगी सरकारी आवास : प्रियंका !    विकास दुबे का सहयोगी शशिकांत गिरफ्तार, पुलिस से लूटी एके-47, इंसास राइफल बरामद !    भारत और चीन की कोर कमांडर-स्तरीय वार्ता का चौथा दौर शुरू !    

यथार्थवादी चरित्र निभाना मुश्किल है विद्या बालन

Posted On January - 8 - 2011

शांतिस्वरूप त्रिपाठी

अभिनय के क्षेत्र में नित नए माप दंड स्थापित कर रही अभिनेत्री विद्या बालन अब फिल्म ‘नो वन किल्ड जेसिका’ से अपनी अभिनय क्षमता का एक नया पहलू उजागर करने जा रही हैं। इस फिल्म में उन्होंने सब्रीना का किरदार निभाते हुए कम से कम संवादों में, महज अपने चेहरे व ऑंखों के हाव भाव से ज्यादा से ज्यादा बात कहने की कोशिश की है। जब हम विद्या बालन से मिलने पहूंचे तो वह हरे बार्डर वाली लाल रंग की साड़ी व कान में खूबसूरत झुमके पहने हुए थीं। तो उनसे मिलते ही हमने बातचीत की शुरूआत उनकी साड़ी से ही की।
आपको साड़ी बहुत ज्यादा पसंद हैं ?
-जी हां! मुझे साड़ी पहनना बहुत पसंद हैं। बचपन से ही मुझे साड़ी पहनने का शौक रहा हैं। मैं बचपन से ही यह अहसास करते हुए बड़ी हुई हूं कि एक नारी के तौर पर साड़ी पहनना बहुत जरूरी हैं। साड़ी एक ऐसी पोशाक हैं, जो हर नारी पर एकदम सटीक बैठती है। फिर चाहे उसका कद छोटा हो या बड़ा हो या वह किसी भी रंग की क्यों न हो। यदि कोई नारी साड़ी पहन ले, तो उसे देख यह कोई नहीं कह सकता कि इस पर साड़ी नहीं जंचती। साड़ी में शरीर पूरी तरह से ढका भी होता हैं और सही अनुपात में खुला भी होता हैं।
लेकिन आपने फिल्म ‘ नो वन किल्ड जेसिका ‘ में साड़ी नहीं पहनी हैं ?
-आपकी बात बिल्कुल सही हैं। इस फिल्म में मैंने वही पोशाक पहनी है, जो आम लड़की अपनी जिंदगी में पहनती हैं। मैंने इसमें सब्रीना का किरदार निभाया हैं, जिसकी बहन जेसिका की मौत 11 वर्ष पहले हुई थी। उस समय वह लड़की छोटी थी।  अक्सर घर में रहती थी, तो जब एक घटना घटी, तब वह मेकअप वगैरह करके तैयार होकर घर से नहीं निकलेगी। उसने जो पोशाक पहन रखी थी, उसी पोशाक में वह घर से बाहर निकली। फिर धीरे धीरे वह अपनी बहन को न्याय दिलाने की लड़ाई में व्यस्त होती चली गयी। उस वक्त उसने सोचा भी नही होगा कि एक दिन वह एक ‘ आयकॉन ‘ बन जाएगी। कइयों के लिए पे्ररणा का स्रोत बन जाएगी। कईयों के लिए ‘ आशा की एक किरण ‘ बन जाएगी। वह सिर्फ अपना काम करती रही।
किसी यथार्थचरित्र को निभाना कितना आसान रहा ?
-सब्रीना के चरित्र को निभाना मेरे लिए बहुत ही ज्यादा अलग अनुभव रहा। फिल्म में 11 साल पहले सब्रीना जैसी रही होगी, वह दिखाया गया है। आज की सब्रनी बहुत अलग हो गयी हैं। तो हमें कल्पना करना था कि उसने 11 साल किस तरह से लड़ाई करते हुए गुजारे हैं। हमने कल्पना की कि सब्रीना एक कोमल सीधी सादी लड़की हैं, जिसकी बहन को सभी पसंद करते हैं। इस कारण वह थोड़ी सकुचाई सी रहती हैं। भीड में खो जाना चाहती हैं। हमने ज्यों का त्यों सब्रीना को इस फिल्म में पेश करने की कोशिश नही की हैं। कल्पना का सहारा काफी लिया गया हैं। वैसे निर्देशक राजकुमार गुप्ता शोधकार्य के दौरान सब्रीना से मिले थे। उससे बहुत सारी जानकारी हासिल की थी। तो मैंने निर्देशक से बातचीत करके कल्पना का सहारा लेकर सब्रीना के व्यक्तित्व को परदेपर पेश करने की कोशिश की है।
जिस दिन जेसिका की हत्या हुई थी, उस दिन इस खबर को सुनकर आपकी पहली प्रतिक्रिया क्या हुई थी ?
-मुझे अच्छी तरह से याद हैं। यह उन दिनों की बात हैं, जब मैं मुंबई के जेवियर कॉलेज में पढ़ाई कर रही थी। सुबह उठकर अखबार में जेसिका की फोटो देखी और पढ़ा कि उसकी हत्या कर दी गयी हैं। उस वक्त मुझे यकीन ही नहीं हुआ कि महज एक डि्रक के लिए कोई किसी की हत्या भी कर सकता हैं। उसके बाद धीरे धीरे यह मामला गर्म होता गया। जेसिका के हत्यारों को सजा मिले, इसकी मांग करते हुए हमने कॉलेज में हस्ताक्षर अभियान चलाया था। उसके बाद अखबारों और टीवी पर इस घटनाक्रम पर जो कुछ आ रहा था, वह सब कुछ देखती व पढ़ती आ रही हूं। तो आप यह भी कह सकते हैं कि सब्रीना को लेकर मै कहीं न कहीं दिमागी रूप से तैयार थी।
जब इस तरह की कोई घटना घटती हैं। तो आपके मन में क्या भाव पैदा होता हैं ?
-बहुत गुस्सा आता है। दो वर्ष पहले मुंबई के जेडब्ल्यू मेरिएट हॉटेंल के सामने नए वर्ष पर लड़कियों के साथ जो छेड़छाड़ की गयी थी, वह सुनकर भी मुझे गुस्सा आया था। मेरी समझ में नही आया था कि लोग मौन रहकर इस तरह की गलत घटना कैसे देखते रह गए ? इस तरह की घटनाओं से मुझे बड़ी निराशा होती हैं। मैं सोचती हूं कि मैं उस वक्त वहां होती तो मैं क्या करती ? कम से कम मैं यह उम्मीद करती हूं कि मैं पुलिस में जाकर कहती कि मेरे सामने क्या क्या हुआ हैं और मैंने क्या क्या देखा हैं। मुझे गुस्सा भी आता है, ऐसे लोगों पर, जो इस तरह के कर्म करते हैं।
रानी मुखर्जी के साथ आपके मनमुटाव की खबरें काफी गर्म हैं?
-मुझे इसका आधार समझ में नहीं आ रहा हैं। रानी मुखर्जी मेरी फेवरेट कलाकार है। खुशी की बात हैं कि हमें एक साथ काम करने का मौका मिला। काम के समय हमारा फोकस सीन को बेहतर बनाने में होता था। हमारे बीच कोई प्रतिस्पर्धा नहीं थी।  वह एक ब्रिलिएंट कलाकार हैं। हम दोनों एक साथ फिल्म का प्रमोशन भी कर रहें हैं।
इसके अलावा क्या कर रही हैं ?
-‘ नो वन किल्ड जेसिका ‘ की शूटिंग पूरी करने के बाद मैं पूरे एक माह तक कलकत्ता में थी। जहां मैने सुजॉय घोष की फिल्म ‘ कहानी ‘ की शूटिंग पूरी की। इसके अलावा एक फिल्म ‘ सिल्कस्मिता ‘ पर करने वाली हूं।  इसके अलावा संतोष शिवन की मलयालम फिल्म ‘ उर्मी ‘ में टाइटल सॉंग पर मैनें डांस किया है। इसे में आइटम सॉंग नहीं मानती।
सुना हैं कि ‘ नो वन किल्ड जेसिका ‘ की शूटिंग के लिए आपने दिल्ली की सड़कों पर खुलेआम शूटिंग की ?
-जी हां निर्देशक राजकुमार गुप्ता छिपे हुए कैमरे से दृश्यों को फिल्मा रहे थे। और मैं दिल्ली के चांदनी चौक जैसे इलाके में भीड़ के बीच घूम रही थी। मेकअप वगैरह किया नहीं था। लोगों ने भी नहीं पहचाना। लेकिन मैंने यह इसलिए किया, क्योंकि चरित्र के निभाने का पैशन था। मेरे लिए जीने मरने का सवाल था कि इसे निभाना है। एक जुनून सा था।
आपने कई चरित्र निभा लिए अब क्या करना चाहती हैं ?
-एक ब्लैक कॉमेडी वाली फिल्म करना चाहती हूं। इस तरह की फिल्म में सोचना नहीं पड़ता। इसके अलावा फिल्मी परदे पर शाहरूख खान व सलमान खान के साथ रोमांस करने के लिए मरी जा रही हूं।
आप टीवी नही कर रही हैं ?
-टीवी के लिए बहुत ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। यूं तो मैं फिल्मों के लिए भी मेहनत करती हूं। पर फिल्म के लिए एक दो माह ही मेहनत करनी पड़ती है। फिर आराम मिल जाता है। जबकि टीवी के लिए लगातार काफी समय के लिए मेहनत करनी पड़ती है।


Comments Off on यथार्थवादी चरित्र निभाना मुश्किल है विद्या बालन
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
Both comments and pings are currently closed.

Comments are closed.

Powered by : Mediology Software Pvt Ltd.