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नारी मन के जज्बात

Posted On January - 8 - 2011

सुर-ताल

संगीत की दुनिया में इसे एक अनूठा प्रयोग कहा जा सकता है। एक ऐसा एलबम, जिसमें नारी मन के जज्बात और नारी के ख्वाबों, खुशियों और गमों की बाते कही गईं है। यह अनोखा प्रयास नारीत्व को खास तरीके से सेलिब्रेट करने की कोशिश है और नारी-रचनाधर्मिता का उत्सव भी। यह केवल स्त्रियों के जरिए ही मूर्त रूप देने का कॉन्सेप्ट है। इसमें शामिल हर गीत में नारी मन के अहसास झलकते हैं, इनमें नारी के ही जज्बात हैं और नारी ने ही उन्हें सुर में पिरोया है। नैरोबी में रहने वाली हिंदुस्तानी कवयित्री और संगीतकार रिमी बसु सिन्हा की उम्मीदों का आकाश इस एलबम में नजर आता है। उन्होंने एलबम के लिए भावना प्रधान नौ गीत लिखे और उन्हें स्वरबद्ध भी किया। उषा मंगेशकर, चित्रा, कविता कृष्णमूर्ति सुब्रह्मण्यम, महालक्ष्मी अय्यर, सुनिधि चौहान और ऐश्वर्या मजूमदार जैसी गायिकाओं ने इन्हें गाया है। चित्रा के गाए गीत ‘सुन सखी मेरी प्यारी सखी…’ के साथ जज्बात का यह सफर शुरू होता है। हम कितना कुछ कहना चाहते हैं, सुनना चाहते हैं, अपनो से उसे बांटना चाहते हैं और यही सब कुछ इस गीत में चित्रित किया गया है। चित्रा की भावपूर्ण गायकी में आपको सच्ची सखी दिख ही जाती है। अगला पड़ाव ‘दीम तान ना…’ गीत है, जिसमें स्त्री मन की आशाएं और उमंगें हैं। जीवन के कण-कण से उसे प्यार है और कितना कुछ वह करना चाहती है। सुनिधि चौहान की खास अंदाज की गायकी में कुछ ऐसे ही जज्बात आप तलाश सकते हैं। ‘दिल के अरमानों की बात…’ गीत में कुछ ऐसी कशिश है कि तेजी से भागती जिंदगी में कितने ही अरमान ऐसे हैं, जो पीछे छूटते जा रहे हैं। वक्त गुजर जाता है, लेकिन जिंदगी की मुश्किलें और उलझनें कभी कम नहीं होतीं। इस अर्थपूर्ण गीत को कविता कूष्णमूर्ति सुब्रह्मण्यम ने गाया है। सूफियाना अंदाज के गीत ‘नैना जागे…’ को ऋचा शर्मा ने स्वर दिया है। इस गीत में खूबसूरत आंखों से नजर आने वाली दुनिया के सौंदर्य को दर्शाने की कोशिश की गई है।  ‘कुछ ना समझ पाई…’ स्त्री के कमसिन मन की दुविधा, नासमझी, नादानी और भावनाओं के तानेबाने को उकेरता है। नए रिश्ते तलाशती स्त्री का अल्हड़पन में किसी से रिश्ता जुड़ जाना बेहद सहज है। यही थीम है इस संवेदना से छलकते गाने की, जो राग खमाज पर आधारित है। महालक्ष्मी अय्यर की जादुई आवाज में इसे सुनते जाइए। नारी मन के श्रृंगार पक्ष का जिक्र अगले गीत ‘बोले क्या…’ में मिलता है। गीत यह कहने का प्रयास करता है कि किसी अपने के लिए श्रृंगार करने में सबसे अधिक आनंद आता है और नारी मन की विभिन्न भावनाओं के साथ श्रृंगार का अर्थ भी बदलता रहता है। इसी भावना को संगीतमय बनाया है उषा मंगेशकर की सुरीली आवाज ने। ‘जो जिंदगी की जंग हार रहा है…’ गीत दरअसल हमारे जीवन का सच्चा आईना है। बच्चियां समाज से सवाल कर रही हैं, उनके मन में पीड़ा है, डर है।
क्या ऐसा नहीं लगता कि उनकी तकलीफ को खत्म कर दें और उनकी पीड़ा का मिटा दें? उन्हें इतना प्यार, सम्मान और बढ़ावा दें कि ये कलियां उन्मुक्त और सुरक्षित भाव के साथ आगे बढ़ें और अपने सपनों को साकार करें। बाल मन से जुड़ी इन्हीं भावनाओं को अभिव्यक्ति दी है बाल गायिका ऐश्वर्या मजूमदार ने।  ‘मेरे मन का पंछी…’ गीत स्त्री के सपनों को आवाज देता है। इसमें उम्मीदों के आसमान पर नई इबारत लिखने का संकल्प भी नजर आता है। इस गीत को रिमी बसु सिन्हा ने गाया है। एलबम के आखिरी गीत ‘नए सपने…’ को सभी गायिकाओं के सम्मिलित स्वर में तैयार किया गया है।

प्र.म.


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