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कहीं सीरियल का जादू कहीं रिएलिटी का जलवा

Posted On December - 25 - 2010

टीवी राउंड अप 2010

प्रदीप सरदाना
देश में सीरियल क्रांति के 25 बरस बाद अब टीवी चैनल्स एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गए हैं जहां उन्हें अपने लिए राह चुननी मुश्किल हो रही है कि किधर जाएं। साथ ही ये भी कि वे दर्शकों को ऐसा क्या परोसें जिससे उनकी टीआरपी भी बढ़े और सरकार की नकेल भी उन पर न कसे। सन् 2010 के टीवी पर चैनल्स की असमंजसता तो साफ नजर आती ही है और यह वर्ष दिखा गया कि फिल्मों की तरह उन पर सेंसर जैसा शिकंजा कसने लगा है। वे या तो खुद सुधर जाएं या फिर सरकार उन्हें सबक सिखाने में पीछे नहीं हटेगी।
इस साल भी जहां टीवी चैनल्स अपने अस्तित्व की लड़ाई में भिड़ते-भिड़ते ऊपर-नीचे होते रहे वहां कहीं सीरियल्स का जादू चला तो कहीं रिएलिटी और गेम शो का जलवा। इस साल जी टीवी जैसा बड़ा चैनल दौड़ में पिछड़ गया तो स्टार प्लस ने अपनी पुरानी सोच को बदल नए सपने देखने शुरू किए। सोनी चैनल ने रिएलिटी शो की नई उड़ान भर सभी को चौंकाया तो कलर्स ने दिखा दिया कि उसमें जोश की कमी नहीं। उधर सब टीवी ने साफ सुथरी कॉमेडी को जारी रखते हुए नई मंजिलों को छुआ तो इमेजिन विवादों की बैसाखियों पर चलते-चलते हांफने लगा। सहारा चैनल तो हर बार की तरह इस बार भी नाकाम रहा।
बात सीरियल की
सीरियल की दुनिया में स्टार प्लस ने अपनी स्थिति मजबूत करते हुए दौड़ में ज्यादातर खुद को आगे बनाए रखा। स्टार के सीईओ उदय शंकर और सीओओ सुनील गुप्ता के किए

गए कुछ नए प्रयोग सार्थक रहे। अपने पुराने हिट सीरियल ‘बिदाई’ की बिदाई करते हुए चैनल ने ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ और ‘प्रतिज्ञा’  से अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी वहां नए सीरियल ‘ससुराल गेंदा फूल’ से नए फूल खिलाते हुए नए दर्शकों को भी अपने साथ जोड़ा। मगर उसके इस साल शुरू हुए और नए सीरियल अपना रंग जमाने में नाकाम रहे। खासतौर से जोर-शोर से शुरू हुए ‘बहनें’ व ‘चांद छिपा बादल में’ बेहद निराशाजनक रहे। नए सीरियल में  ‘काली’, ‘गुलाल’, ‘साथ निभाना साथिया’ और ‘मर्यादा’ भी अपेक्षित लोकप्रियता नहीं बटोर सके।
सीरियल के मामले में कलर्स चैनल ने अपना ज्यादा फोकस अपने 4 पुराने सीरियल पर ही रखा और इन्हीं के दम पर वह अपनी बाजी खेलकर नम्बर दो बना रहा। जिसमें ‘बालिका वधू’, ‘ना आना इस देश लाडो’, ‘लागी तुझसे लगन’ और ‘उतरन’ जैसे सीरियल हैं। चैनल समय के साथ करवट लेते हुए जहां ‘लाडो’ की कहानी को 18 साल आगे बढ़ाते हुए कहानी को दिल्ली ले आए वहां ‘लागी’ में नकुशा का मेकओवर किया, ‘उतरन’ में बच्चियों को बड़ा कर उनका वैवाहिक जीवन दिखाया। मगर कलर्स के ब्रांड बन चुके सीरियल में चैनल ने ‘बालिका वधू’ (अविका गौड़) को बड़ा करके अपने अनेकों अनेक दर्शकों को खो दिया। हां ‘बैरी पिया’, ‘ये प्यार न होगा कम’ व ‘थोड़ा है बस थोड़े की जरूरत है’ को समय रहते बंद करके चैनल ने समझदारी दिखाई।   सोनी चैनल कुल मिलाकर अपनी स्थिति मजबूत करते हुए तीसरे नम्बर पर तो पहुंच गया लेकिन लोकप्रिय सीरियल देने में वह इस बार भी पिछड़ गया। सोनी ने सन् 10 की शुरुआत यशराज बैनर के 5 नए शो और सीरियल ‘माही वे’, ‘पाउडर’, ‘सेवन’, ‘लिफ्ट करा दे’ और ‘रिश्ता डॉट कॉम’ से की मगर ये सभी ताश के महल की तरह हवा के झौंके में ही उड़ गए। बाद में भी चैनल के ज्यादातर नए सीरियल फ्लॉप रहे जिनमें ‘पिता’ को तो चैनल ने तुरंत बंद भी कर दिया। ‘तेरा मुझसे है पहले का नाता कोई’, ‘कृष्णा बेन’ और ‘अदालत’ भी जम नहीं सके। ‘सास बिना ससुराल’ औसत है। हां टोनी दिया का ‘बात हमारी पक्की है’  जरूर दर्शकों को पसन्द आ रहा है। साथ ही उसके पुराने माइल स्टोन सीरियल ‘सीआईडी’ और ‘आहट’ जमे हुए हैं।

जी टीवी का पिछडऩा

जी टीवी कभी देश का नम्बर वन सेटेलाइट चैनल था। इसी की सफलता देख देश में सेटेलाइट चैनल्स की बाढ़ आई। पर आज यह चैनल जिस तरह पिछड़ रहा है वह आश्चर्य भी देता है और अखरता भी है। चैनल का पिछडऩे का सबसे बड़ा कारण इसका खराब पीआर सिस्टम है। चैनल के पास कई अच्छे सीरियल हैं पर उसके कमजोर और थके जनसंपर्क विभाग के कारण दर्शक ऐसे कार्यक्रम से अंजान हैं। हालांकि चैनल के पुराने 4 सीरियल दर्शकों में अच्छे खासे पसन्द किए जा रहे हैं। ये सीरियल हैं -‘पवित्र रिश्ता’, ‘झांसी की रानी’, ‘अगले जन्म मोहे बिटिया ही कीजो’ और ‘यहां मैं घर-घर खेली’। पर इस साल शुरू हुए उसके तमाम नए सीरियल औंधे मुंह जाकर गिरे जिनमें ‘मेरा नाम करेगी रोशन’ तो बंद भी कर दिया गया। जब कि ‘भागों वाली’, ‘दिल से दिया वचन’ का बुरा हाल है और ‘राम मिलाई जोड़ी’ व ‘संजोग से बनी संगिनी’  थोड़े बहुत पसन्द किए जा रहे हैं।
सब टीवी का धमाल
सोनी का सब टीवी एक ऐसा चैनल है जिसने इस बरस इतिहास रच दुनिया को दिखा दिया है कुछ करने की इच्छा हो तो इंसान जमीन से आकाश में छेद कर सकता है। यूं सब टीवी अपने बजट और अपनी रेंज के मामले में एक छोटा चैनल है मगर अपने अच्छे कार्यक्रमों की बदौलत ये चैनल आज मुख्य धारा का चैनल बन गया है और बड़े चैनल्स के लिए लगातार चुनौती भी बनता जा रहा है। चैनल का ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ और ‘एफ आई आर’ पहले की तरह लोकप्रिय है ही अब उसमें ‘सजन रे झूठ मत बोलो’, ‘पापड़ पोल’ और ‘लापता गंज’ भी जुड़ गए हैं। इन सीरियल में न कोई तंत्र-मंत्र है और न घरों-परिवारों को तोडऩे की साजिश है न कोई मर्डर मिस्ट्री है और न कोई खलनायक। बस है तो खालिस शत प्रतिशत कॉमेडी और खुशी ही खुशी।

बेहाल ‘इमेजिन’

इमेजिन चैनल ने 2008 में बहुत अच्छी शुरुआत की थी लेकिन पिछले दो बरसों में ये लगातार नीचे गिर रहा है। चैनल के पुराने सीरियल में सागर आर्ट्स का ‘महिमा शनि देव की’ तो आज भी पसन्द किया जा रहा है। इसके नए सीरियल ‘बाबा ऐसो वर ढूढ़ों’ और ‘कितनी मुहब्बत है-टू’ औसत भर कहे जा सकते हैं। वरना इसका पुराना सीरियल ‘बंदिनी’ हो या बाद के सीरियल ‘रक्त सम्बंध’ और ‘आरक्षण’ सभी व्यर्थ से लगते हैं। दर्शक न जुटाने के कारण चैनल ने अपने ‘बसेरा’, ‘जमुनिया’, ‘मीरा’, ‘काशी’ और ‘दो हंसों का जोड़ा’ जैसे कई सीरियल बंद कर दिए।
उधर सहारा चैनल तो लाख हाथ पैर पटकने के बाद भी तिल भर भी आगे नहीं खिसक पा रहा है। सहारा का एक ही सीरियल राजश्री प्रोडक्शन का ‘वो रहने वाली महलों की’ ही चल पा रहा है।

मामला रिएलिटी शो का

इस साल रिएलिटी शो में यदि कोई सरताज रहा तो वह सोनी चैनल रहा। यही कारण रहा कि यह चैनल सिर्फ रिएलिटी और गेम शो की बदौलत स्टार और कलर्स के साथ सीना तानकर खड़ा रहा। इसका एक बड़ा श्रेय सोनी के सीईओ मंजीत सिंह और सीओओ एन पी सिंह और उनकी टीम को जाता है। चैनल ने अपने ‘इंडियन आइडल’ के सीजन-5 को लगातार धमाकेदार बनाए रखा। मगर पहला बड़ा धमाका तब हुआ जब अमिताभ बच्चन के साथ केबीसी का सीजन फोर आया और माधुरी दीक्षित के साथ ‘झलक दिखला जा’ का सीजन फोर। इससे माधुरी की वापसी तो हुई ही साथ ही अमिताभ ने भी केबीसी में अपनी वापसी करके दिखा दिया कि केबीसी को यदि कोई लोकप्रिय बना सकता है तो वह सिर्फ अमिताभ बच्चन। इन तीनों शो के इस सीजन को सोनी ने जो नई हाइट्स दीं उससे साफ हो गया कि आज रिएलिटी शो में सोनी का कोई सानी नहीं है।
उधर रिएलिटी शो में सबसे ज्यादा शर्मिन्दा किया इमेजिन ने अपने ‘राखी का इंसाफ’ से। एक तो विवादों की देवी राखी सांवत को चैनल ने इंसाफ की देवी बनाकर जो भूल की सो की,  ऊपर से उसकी बेलगाम जबान के कारण एक व्यक्ति की जान भी चली गई। इसी के चलते सरकार की आंखें खुली और इस शो को देर रात करने के आदेश दे दिए गए। इससे राखी सावंत के तेवर भी ढीले पड़ गए। इमेजिन चैनल ‘राज पिछले जन्म का’ के कारण भी विवादों में आया। यूं उसका ‘देसी गर्ल’  जरूर कुछ चला मगर ‘मीठी छुरी’ कड़वा ही रहा। उसका ‘नचले वे’ भी औसत जा रहा है।
अब बात करते हैं ‘कलर्स’ की। जिस पर लगातार इस तरह के शो आते रहे। पर उसके दो शो ही लोकप्रिय हुए। एक ‘बिग बॉस’ और दूसरा ‘इंडियाज गॉट टेलेंट’। ‘बिग बॉस’ के सीजन फोर को इस बार सलमान खान ने पेश किया और वह इसमें जमे भी खूब। लेकिन डॉली बिन्द्रा के गाली गलौज और वीना मलिक, सारा खान, अश्मित  और अली मर्चेन्ट के कारण शो में कई विवाद उठे। सरकार ने इस पर भी नकेल कसी तो सभी लाइन पर आ गए। इसके अलावा ‘खतरों के खिलाड़ी’ को प्रियंका चोपड़ा के साथ कुछ पसन्द तो किया गया मगर अक्षय कुमार वाली बात नहीं आई। कलर्स के इन शो के अलावा कोई और शो नहीं चल पाए जिनमें अभिषेक बच्चन के साथ ‘बिंगो नाइट्स’ के अलावा ‘किचन चैंपियन’ और ‘चक धूम धूम’ शामिल हैं।
उधर जी टीवी का ‘डांस इंडिया डांस’ तो चला मगर उसका सदाबहार शो ‘सा रे गा मा पा’  इस बरस फीका ही रहा। स्टार प्लस का अक्षय कुमार के संग ‘मास्टर शेफ इंडिया’  भी बुरी तरह फ्लॉप हो गया। इस बरस रिएलिटी शो, गेम शो के माध्यम से टीवी पर सितारों का जबरदस्त जमावड़ा रहा। जिनमें अमिताभ बच्चन अव्वल रहे और सलमान, माधुरी भी छा गए। प्रियंका, रानी औसत रहे मगर अक्षय कुमार, अभिषेक बच्चन मात खा गए।

नई फिल्मों का बोलबाला

यह बरस टीवी पर नई-नई फिल्मों के फटाफट प्रसारण के लिए यादगार रहा। यूं इसकी शुरुआत पिछले बरस ही हो गई थी पर इस बार सोनी ने ‘3 इडियट्स’, स्टार ने ‘प’, ‘माई नेम इज खान’, ‘हाऊसफुल’ और ‘आई हेट लव स्टोरीज’ तो कलर्स ने ‘दबंग’, ‘रावण’, ‘काइटस’, ‘खट्टा मीठा’ और ‘राजनीति’ जैसी इसी साल की फिल्मों को रिलीज के चंद दिनों बाद ही दिखाकर टीआरपी बटोरने का नया सफल खेल रचा।


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