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मंत्री के कोप का भाजन पांच सितारा होटल!

Posted On May - 17 - 2010

सुरक्षा जांच से गुजरना रास न आया मंगतराम को

शीला दीक्षित से मिली फटकार

राजकुमार सिंह
ट्रिब्यून न्यूज सर्विस

नयी दिल्ली, 16 मई। अवंाछित विवादों पर कांगे्रसी मंत्रियों का कॉपीराइट -सा बनता जा रहा है। दिल्ली सरकार के मंत्री भी इस मामले में अपनी कें द्र सरकार से पीछे नहीं रहना चाहते। कारगर सुरक्षा प्रबंधों के लिए आम आदमी को सुरक्षा एजेंसियों से सहयोग की नसीहत देनेवाली दिल्ली सरकार के एक मंत्री की कार की तलाशी राजधानी के एक पांच सितारा होटल को महंगी पड़ी। खाद्य, श्रम , बिजली  और स्वास्थ्य समेत तमाम विभागों की निगाहें अचानक ही इस होटल पर टेठी हो गयीं। मामला क्योंकि नामचीन पांच सितारा होटल का था, इसलिए पैरवी मुख्यमंत्री शीला दीक्षित तक पहुंची और उन्होंने मंत्री को बुला कर फटकारा।
मामला दिल्ली के समाज कल्याण मंत्री मंगत राम सिंघल से जुड़ा है। जानकार सूत्रों के मुताबिक पिछले बुधवार की शाम वह एक कार्यक्रम में भाग लेने राजधानी के नामचीन पांच सितारा होटल मौर्या शेरेटन गये थे। आतंकवादी हमलों की  चेतावनी और अक्तूबर में होनेवाले राष्ट्रमंडल खेलों  के मद्देनजर राजधानी में होटलों समेत सभी महत्वपूर्ण स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गयी है। इसीलिए किसी भी पांच सितारा होटल में प्रवेश से पहले वाहन की पूरी तरह तलाशी ली जाती है।
बताया जाता है कि जब तलाशी के लिए सिंघल की कार को रोका गया तो वह इसे अपमान समझ कर खफा हो गये। सुरक्षा कर्मियों से उनकी बहस भी हुई,पर सत्ता के नशे का असली खेल बाद में शुरू हुआ। दिल्ली सरकार के अधीन आनेवाले श्रम, खाद्य, स्वास्थ्य , बिजली और दमकल आदि विभागों ने अचानक ही इस पांच सितारा होटल के विरुद्ध मुहिम छेड़ दी। होटल की बिजली की फिटिंग से ले कर आग से बचाव तक की तैयारियों की जांच की जाने लगी तो खाद्य पदार्थों के भी नमूने लिये गये।
मामला क्योंकि राजधानी के चर्चित और नामचीन पांच सितारा हेाटल का था, जहां सत्ता गलियारों के अनेक महत्वपूर्ण किरदारों की शामें गुजरती हैं, सो पैरवी मुख्यमंत्री शीला दीक्षित तक पहुंचने में ज्यादा देर नहीं लगी। मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों के मुताबिक शीला दीक्षित ने मंगत राम सिंघल को तलब किया और फटकारते हुए आगाह किया कि भविष्य में ऐसा दोबारा नहीं होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने होटल के विरुद्ध प्रतिशोधात्मक कार्रवाई करनेवाले विभागों के अधिकारियों को भी डांटा है।
दिलचस्प यह है कि मंगत राम सिंघल मुख्यमंत्री द्वारा खुद को तलब किये जाने की बात तो स्वीकार रहे हैं, पर उसक ा कारण बनी घटना को सिरे से ही नकार रहे हैं। बकौल उनके, वह अकसर पांच सितारा होटलों में जाते रहते हैं और सुरक्षा प्रक्रिया से परिचित हैं। इसलिए ऐसी किसी घटना के होने का प्रश्र ही नहीं उठता। जहां तक होटल के विरुद्ध अनेक सरकारी विभागों की सक्रियता का सवाल है तो उसे सिंघल जनहित में रूटीन कार्रवाई बताते हैं, पर मानते हैं कि उस कथित घटना की चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री ने उन्हें बुलाया था। यह भी कि मुख्यमंत्री उनकी बॉस हैं और वह उनके निर्देशेंा का पालन करने को बाध्य हैं।
वैसे विवादों में घिरनेवाले मंगत राम सिंघल दिल्ली के पहले मंत्री नहीं हैं। उनसे पहले परिवहन मंत्री रहते हुए हारुन युसुफ उच्च संपर्क वाले लोगों को वीआईपी कार नंबर आवंटन में मनमानी के लिए विवाद में फंस चुके हैं तो खुद मुख्यमंत्री शीला दीक्षित भी जेसिका लाल हत्याकांड के अभियुक्त मुन शर्मा को नियमों और प्रक्रियाओं को ताक पर रख कर पैरोल देने के लिए आलोचनाओं का केंद्र बनी हुई हैं।


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