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बिजली कर्मियों के विरोध के बावजूद बोर्ड को भंग करना अन्यायपूर्ण : भंगल

Posted On May - 19 - 2010

मोरिंडा, 18 मई (निस) टेक्निकल सर्विसज यूनियन  सर्कल रोपड़ के कर्मचारियों ने राज्य वर्किंग कमेटी के फैसले अनुसार आज यहां नामदेव भवन में कन्वैंशन की जिसकी अध्यक्षता सर्कल अध्यक्ष सिकंदर सिंह ने की। इस कन्वैंशन में मोरिंडा, रोपड़, समराला और आनंदपुर साहिब से चुने हुए पदाधिकारी एवं सरगर्म सदस्य शामिल हुए। इस कन्वैंशन को सर्कल कमेटी सदस्यों जगदीश कुमार, बलबीर सिंह, संतोख सिंह तथा देविन्द्र सिंह के अतिरिक्त राज्य अध्यक्ष गुरदयाल सिंह भंगल, मुख्य राज्य संगठन सचिव बलवंत सिंह, कार्यालय सचिव कृपाल सिंह तथा सहायक राज्य सचिव बलौर सिंह आदि ने सम्बोधित किया।
इस कन्वैंशन को सम्बोधित करते राज्य अध्यक्ष गुरदयाल सिंह भंगल ने कहा कि पंजाब सरकार ने बिजली कर्मचारियों, किसानों तथा म•ादूरों के विरोध के बावजूद बिजली बोर्ड को भंग करके दो कम्पनियों में तबदील कर दिया है जोकि कम्पनी एक्ट 1956 के अन्तर्गत रजिस्टर्ड करवाई गई हैं। इस एक्ट के अन्तर्गत कम्पनियों में निजी निवेश का रास्ता खोल दिया गया है जिससे कि इनको अन्य छोटी-छोटी कम्पनियों में बांट कर आखिर में निजी मालिकों के अधीन कर दिया जाना है। भंगल ने कहा कि बोर्ड भंग करते समय बादल सरकार द्वारा दिए झूठे आश्वासनों का पर्दा उठ चुका है क्योंकि सरकार द्वारा यह प्रचार किया गया था कि कर्मचारियों की सेवा शर्तें वहीं रहेंगी मगर कम्पनी की मैनेजिंग कमेटी द्वारा संगठनों को जारी किए गई तबदीली योजना पत्र में साफ तौर पर लिखा है कि बिजली कर्मचारियों द्वारा की गई 25-30 वर्षों की नौकरी सेवा समाप्त हो गई है और कम्पनी में नए सिरे से कर्मचारियों की आरजी सेवा तबदीली योजना लागू होने तक रहेगी और यह कर्मचारियों की परख का समय होगा। कर्मचारियों को पक्का करने तथा सेवा शर्तें तय करने का अधिकार कम्पनी द्वारा बनाई कमेटी के पास रहेगा।
भंगल ने कहा कि वास्तव में इन कम्पनियों ने अपने मुनाफे बढ़ाने के लिए कर्मचारियों की संख्या कम करके पक्की वेतन प्रणाली समाप्त करके कच्चे कर्मचारी रखो व निकालो वाली नीति लागू करनी है क्योंकि सेवा शर्तों में यह भी दर्ज है कि जो कर्मचारियों को पहले पेंशन, गै्रच्यूटी, लीव इन कैशमेंट तथा अन्य भुगतान सरकार द्वारा किए जाते थे उन्हें अब इन कम्पनियों द्वारा कर्मचारियों के अंशदान में से ही करने हैं क्योंकि सरकार ने उपरोक्त लाभ देने से साफ पल्ला झाड़ लिया है।
भंगल ने बताया कि घातक अथवा गैर-घातक दुर्घटना होने की सूरत में जो कर्मचारियों को मुआवजा मिलता था अब इन कम्पनियों की नयी शर्तों अनुसार कर्मचारी एक्ट 1948 के भाग 14 और न ही एक्ट 2003 की धारा 131-132 तथा न ही किसी राज्य अथवा केन्द्रीय कानून के अन्तर्गत पीडि़त कर्मचारी मुआवजा लेने का हकदार होगा।  उन्होंने बताया कि उपरोक्त बातों पर विस्तृत चर्चा करने उपरांत सघर्ष करने की तैयारी की गई है जिसके पहले पड़ाव में 7 जून को मोगा में बोर्ड को भंग करने के फैसले के विरोध में विशाल धरना दिया जाएगा जिसमें निकटवर्ती चार सर्कलों के कर्मचारी शामिल होंगे और शेष सभी पंजाब की डिवीजनों पर धरने देंगे। बिजली कर्मचारियों ने मांग की कि बिजली एक्ट 2003 लागू करना बंद किया जाए और बिजली कर्मचारियों की सेवा शर्तें बिजली एक्ट 1948 अनुसार बहाल रखी जाएं।


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