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पांचवीं में पिंजौर चिडिय़ाघर का पढ़ाया जा रहा है पाठ !

Posted On May - 7 - 2010

हरियाणा शिक्षा बोर्ड की पांचवीं कक्षा के अंग्रेजी के पाठ में पिंजौर चिडिय़ाघर का अध्याय। -छाया : निस

पिंजौर , 6 मई (निस)। पिंजौर के प्रसिद्ध मुगल बाग यादविन्द्रा गार्डन के लघु चिडिय़ाघर को बंद हुए लगभग 11 वर्ष हो चुके हैं लेकिन लघु चिडिय़ाघर का पाठ हरियाणा शिक्षा बोर्ड की पांचवीं कक्षा की अंग्रेजी की पुस्तक में आज भी पढ़ाया जा रहा है जिसे पढ़कर कई नन्हें पर्यटक पिंजौर गार्डन घूमने तो आते हैं इस आस से कि उन्हें जंगली जानवर देखने को मिलेंगे लेकिन वे पिंजौर आने के बाद उदास हो जाते हैं जब उन्हे जानवरों के पिंजरे भी नजर नहीं आते।
हरियाणा स्टेशनरी की प्रेस में छपी अंग्रेजी की पुस्तक के 12 वें अध्याय में ए डे एट पिंजौर के नाम से चिडिय़ाघर घूमने का चित्र सहित पूरा पाठ है  जिसे पढ़कर बच्चों की गार्डन और चिडिय़ाघर घूमने की जिज्ञासा होती है लेकिन उन्हे पिंजौर आकर पता चलता है कि वे ठगे गए हैं।
पिंजौर निवासियों और नन्हे पर्यटकों ने सरकार से पुन: चिडिय़ाघर खोले जाने की मांग समय-समय पर की लेकिन उसे अनसुना कर दिया गया। लोगों ने मांग की है कि या तो किताब से उक्त पाठ को हटाया जाए, जो 11 वर्ष बाद भी पढ़ाया जा रहा है या पुन: चिडिय़ाघर खोला जाए।
हरियाणा के अलग राज्य बनने के बाद सन 1974 में प्रदेश का प्रथम चिडिय़ाघर और पर्यटन केन्द्र की स्थापना की गई थी। चिडिय़ाघर का रखरखाव वन्य प्राणी सरंक्षण विभाग के पास था लेकिन विभाग के पास बजट की कमी के कारण इसमें रखे जानवरों के चारे का खर्चा भी निकालना कठिन हो गया था।
विभाग ने बंसी लाल सरकार के शासनकाल में पर्यटन विभाग से कुछ खर्चा वहन करने की मांग भी की थी लेकिन पर्यटन विभाग ने इसे देने से इंकार कर दिया था। उन्हीं दिनों में मेनका गांधी की पशु प्रेमी संस्था ने यहां पर रखे जानवरों विशेषकर बंदरों के पिंजरों को लेकर आपत्ति जताई थी और पिंजरों को बड़ा करने  अन्यथा चिडिय़ाघर को बंद करने की सिफारिश की थी। जानवरों के चारे का खर्चा न निकाल पाने वाले विभाग पर पिंजरों को बनाने का खर्चा भी आन पड़ा तो सरकार ने भी हाथ खड़े कर दिए। परिणामस्वरूप चिडिय़ाघर को बंद कर देना पड़ा था।


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