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हाईकोर्ट में ठुस्स हुआ पुलिस का दावा

Posted On March - 11 - 2010

मारुति कार में तीन बोरियों  के साथ छह व्यक्ति कैसे?
सौरभ मलिक/ट्रिन्यू
चंडीगढ़, 10 मार्च। मारुति कार में 120 किलो चूरा पोस्त ले जा रहे छह व्यक्तियों को पकडऩे के पुलिस के दावे की हाईकोर्ट में उस समय हवा निकल गयी जब कोर्ट के आदेश पर करायी गयी ‘घटनाक्रम की फोटो’ से यह साबित हुआ कि कार में तीन बोरियां लेकर छह लोग बैठ ही नहीं सकते। रणबीर सिंह, अमरजीत कौर और जसबीर कौर की याचिका पर उक्त कार्रवाई हुई। इन तीनों ने हिसार के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश द्वारा मई, 2002 के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें इन तीनों को दस साल कैद की स•ाा सुनायी गयी थी। इस्तगासा के अनुसार 6  अप्रैल 1997 को एक गुप्त सूचना के आधार पर वाहन को पकड़ा गया था। चालक भाग निकला था जबकि अन्य सभी पकड़ लिये गये थे। हाईकोर्ट में याचिकादाताओं की वकील गुरशरण कौर मान ने दावा किया था कि चूरा पोस्त की तीन बोरियां लेकर चालक समेत छह लोग मारुति कार में बैठ ही नहीं सकते।
उनकी दलीलें सुनकर न्यायाधीश शामसुंदर ने कहा – याचिकादाताओं के वकील की बात में दम लगता है। यह कोई ट्रक जैसा बड़ा वाहन नहीं है कि चूरा पोस्त के तीन बोरे लेकर छह व्यक्ति इसमें बैठ जायें। इसी कोर्ट ने प्रथम अक्तूबर, 2002 को एसएचओ को निर्देश दिया था कि कार में तीन बोरियों के साथ छह व्यक्ति बिठाकर फोटो करवायें और फिर फोटो कोर्ट में पेश करें। ‘चित्रों से साफ होता है कि 40-40 किलो चूरा पोस्त की तीन बोरियां लेकर मारुति कार में छह व्यक्ति यात्रा नहीं कर सकते। प्रतीत होता है कि बरामदगी वैसे नहीं हुई जैसे दिखायी गयी। साथ ही लगता है कि स्पष्टत: यह अभियुक्तों के नाम डाली गयी थी… क्यों? यह जांच अधिकारी ही बता सकता है’ – कोर्ट ने कहा।
याचिकादाताओं को बरी करते हुए न्यायाधीश शामसुंदर ने निचली अदालत की कार्यप्रणाली पर भी टिप्पणी की है : ‘यदि उसने सभी खामियों  पर ध्यान दिया होता तो कभी यह निष्कर्ष न निकाला जाता कि अभियुक्तों ने अपराध किया है। अत: दोषी ठहराये जाने व स•ाा सुनाये जाने संबंधी निर्णय को निरस्त किया जाता है।’


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