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मुंबई डायरी

Posted On March - 13 - 2010

करण कहां है स्क्रिप्ट

हमेशा की तरह इस बार भी करण जौहर  ‘माई नेम इज खान’ ई नेम इज खान) जैसे अंग्रेजीदां लोग भला हिंदी फिल्मों की अच्छी पटकथा कैसे लिखेंगे। फिर भी ज्यादातर निर्माता अच्छी स्क्रिप्ट का रोना रोते रहते हैं जबकि उन्हें ऐसे लोगों से बहुत दूर रहना चाहिए। बहुत कम लोगों को पता हो कि बहुत तिकड़म लगाकर अंग्रेजीदां निरंजन अयंका गुणगान करते नजर आ रहे हैं।  लेकिन सबसे दुखद स्थिति यह है कि करण ने अपनी इस फिल्म की स्क्रिप्ट को बेहद उम्दा बताया है। वैसे भी ज्यादातर हिंदी फिल्मों की पटकथा लेखन में हिंदी की बजाय अंग्रेजी का बोलबाला होता है। ठीक भी है शिवानी और निरंजन अयंगर (मागर ने अब करण की फिल्मों से जावेद अख्तर जैसे जहीन गीतकार को हटाकर गीत लिखना शुरू कर दिया है। इस फिल्म के संगीत का क्या हश्र हुआ है, यह सभी जानते हैं। जावेद साहब से इसका जिक्र करने पर वह इस प्रसंग पर कुछ भी बोलना नहीं चाहते हैं। मगर हिंदी फिल्मों में स्क्रिप्ट की जो दयनीय हालत हुई है उससे वह जरूर बहुत दुखी हैं।

शांत है मुग्धा

‘जेल’ के बाद उनकी व्यस्तता की कोई खबर सुनने को नहीं मिल रही है। वैसे पिछला साल उनका काफी अच्छा बीता है। अजय देवगन की हिट फिल्म ‘आल द बेस्ट’ में उनकी परफार्मेंस की सराहना हुई है। देखा जाये तो अब तक रिलीज ‘फैशन’ सहित अपनी तीनों फिल्मों में अभिनेत्री मुग्धा गोडसे ने अपनी मौजूदगी का भरपूर एहसास कराया है। फिर क्या वजह है कि इन दिनों उनकी सारी व्यस्तता फैशन वल्र्ड के इर्द-गिर्द ही सिमटी हुई है? वह रैंप पर तो खूब दिखाई पड़ रही हैं, पर शूटिंग फ्लोर पर उन्हें बहुत कम देखा जा रहा है। क्या वह भी अन्य दूसरी अभिनेत्रियों की तरह फिल्म इंडस्ट्री के अंदरूनी पॉलिटिक्स का शिकार हो रही हैं। मुग्धा इस बात से इनकार कर रही हैं, पर वर्तमान का सच कुछ ऐसा ही है।  फैशन के लिए प्रियंका और कंगना को ढेरों पुरस्कारों से नवाजा जा रहा है, पर मुग्धा का कोई नामलेवा नहीं है।

बप्पी दा और राजू का मिलना

लगभग पांच सौ से ज्यादा फिल्मों के लिए बतौर प्रचार अधिकारी काम कर चुके राजू कारिया अब फिल्म लेखन के क्षेत्र में भी उतरे हैं। हाल ही में शुरू हुए निर्माता विलास राव की फिल्म ‘बप्पी दा तुसी ग्रेट हो’ का स्टोरी आयडिया उनका है। जैसा कि फिल्म के मुहूर्त और टाइटल से साफ हो गया है, इसकी कहानी प्रसिद्ध संगीतकार बप्पी लाहिरी के इर्द-गिर्द घूमती है। लीड रोल भी वह कर रहे हैं। कहानी के बारे में पूछने पर राजू कारिया इसे कोई राज नहीं रखते हैं, ‘असल में बप्पी दा का आभूषण शौक कोई नया नहीं है। उनके बारे में यह मशहूर है कि वह विश्व के पहले ऐसे संगीतकार हैं, जो सबसे ज्यादा सोने और हीरे के आभूषणों से लदे रहते हैं जिसकी लागत लगभग करोड़ों में  बतायी जाती है। बस इस बात को ध्यान में रखकर मेरे जेहन में यह ख्याल आया कि यदि इन गहनों के लालच में कोई बप्पी दा का अपहरण कर ले तो क्या होगा। बस, इसके बाद ढेर सारा रोचक घटनाक्रम स्वत: ही इसमें जुड़ता चला गया। फिल्म में तीन टपोरी टाइप के लड़के इसी सोच को अंजाम देते हैं।

रेखा का शृंगार

अभी हाल में रेखा एक सौंदर्य प्रसाधन की  लांचिंग में दिखाई पड़ी। नये दौर की कई तारिकाएं आज भी उनके रूप-लावण्य के सामने बहुत छोटी नज़र आती हैं। इस मौके पर रेखा ने कहा, ‘फिटनेस का मेरा पूरा क्रिया-कलाप दक्षिण भारतीय अंदाज में होता है। मैं रोज बालों में अच्छी तरह से तेल की मालिश करती हूं। फिर शिकाकाई लगाती हूं। मुंह पर लगाती हूं पिसी हुई दाल। इससे त्वचा में छिपा सारा मैल बाहर निकल आता है, त्वचा बेहद निखर आती है। सबसे बड़ी बात यह है कि बढ़ती उम्र की फिक्र छोड़कर मैं हमेशा अपने आपको युवा मानती हूं।’

आशीष कुमार


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