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मां, तुझे सलाम

Posted On March - 10 - 2010

ऐतिहासिक क्षण

मातृशक्ति तुझे प्रणाम! अंतर्राष्टï्रीय महिला दिवस (सोमवार) को उमड़े  आशंकाओं के बादल छंट गये और राज्यसभा ने एक ही दिन बाद लोकसभा व विधानसभाओं में  महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का ऐतिहासिक विधेयक दो-तिहाई से भी ज्यादा मतों से पारित कर दिया। इस तरह हो गयी महिलाओं की बल्ले-बल्ले। बाहर से समर्थन दे रहे कुछ दलों का समर्थन खोने और अस्थिरता का खतरा उठाते हुए सरकार अंतत: 14 साल से लटके इस विधेयक को उच्च सदन में पारित कराने में कामयाब हो गयी, जिसमें मुख्य विपक्षी दल भाजपा और वाम ने उसका समर्थन किया। विधेयक को लेकर कल अशोभनीय बर्ताव करने वाले सात सांसदों को आज निलंबित कर मार्शलों के जरिए सदन से बलपूर्वक बाहर निकालकर विधेयक पारित कराने की प्रक्रिया को आगे बढाया गया। विधेयक के पक्ष में 186 मत पड़े, जबकि विरोध में केवल एक। महिला विधेयक पर दो धड़ों में बंटती नजर आ रही जद (यू) के पांच सांसदों ने विधेयक के पक्ष में मतदान किया।


महिला आरक्षण की पहली रुकावट पार

राज्यसभा ने विधेयक किया पास

सात विरोधी सदस्य निलंबित, कंधे पर लादकर बाहर भिजवाये

राजकुमार सिंह /ट्रिब्यून न्यूज सर्विस
नयी दिल्ली, 9 मार्च। पिछले लगभग डेढ़ दशक से राजनीतिक चक्रव्यूह में फंसे  महिला आरक्षण विधेयक ने आज राज्यसभा के रूप में एक

नयी दिल्ली में मंगलवार को लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक पारित होने के बाद न•ामा हेपतुल्ला से गले मिलती हुईं। माकपा नेत्री वृंदा करात भी साथ खड़ी हैं। -दैनिक ट्रिब्यून

बाधा पार कर ली। सोमवार को राज्यसभा में अशोभनीय व्यवहार करनेवाले सात विरोधी सांसदों के आज निलंबन, कार्यवाही स्थगन के बाद भी  उनके  सदन में ही तीन घंटे तक धरने पर बैठे रहने, फिर उन्हें मार्शलों द्वारा कंधे पर उठाकर जबरन सदन से बाहर किये जाने और उसके बाद तीन घंटे तक चली चर्चा के बाद महिला आरक्षण विधेयक देर शाम एक के मुकाबले 186 मतों से पारित तो कर दिया गया, पर सपा, राजद और लोजपा के बाद अब बसपा और तृणमूल कांग्रेस भी सरकार से रू ठ गयी हैं। इन दोनों ने मतदान का बहिष्कार किया।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अगले दिन ही सही, इस विधेयक के राज्यसभा में पारित करवा कर कांग्रेस के नेतृत्ववाली संप्रग सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता तो निभा दी है,पर अब उसके ऊपर अविश्वास प्रस्ताव का खतरा मंडराने लगा है। विरोध में मतदान करनेवाले एकमात्र संसद स्वतंत्र भारत पक्ष के शरद जोशी रहे।
सोमवार  को छह बार कार्यवाही के स्थगन के बाद जब शाम छह बजे राज्यसभा मंगलवार के लिए स्थगित की गयी तब संकेत दिया गया था कि प्रधानमंत्री सर्वदलीय बैठक बुला कर गतिरोध समाप्त करना चाहेंगे, लेकिन ऐसी कोई बैठक नहीं बुलायी गयी। अलबत्ता महिला आरक्षण विधेयक के मौजूदा स्वरूप के धुर विरोधी सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव और राजद मुखिया लालू प्रसाद यादव की कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और  प्रधानमंत्री  से अवश्य मुलाकात हुई, पर रास्ता कुछ नहीं निकला।
उधर कल के अशोभनीय  व्यवहार के लिए सात विरोधी संासदों को आज दोपहर 12 बजे निलंबित कर दिये जाने और फिर कार्यवाही स्थगन के बावजूद उनके सदन में  धरने पर बैठ जाने से स्थिति और भी बिगड़ती नजर आयी। इस चक्रव्यूह से निकलने के लिए संसद परिसर में ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपने रणनीतिकारों के साथ बैठक की। बाद का घटनाक्रम बताता है कि शायद इसी बैठक में महिला आरक्षण विधेयक को हर हाल में पारित कराने की रणनीति बनायी गयी।
दो बजे जब राज्यसभा की कार्यवाही पुन: शुरू हुई तब भी निलंबित सदस्य धरने पर बैठे रहे और विरोधी सदस्य नारेबाजी भी करते रहे। नतीजतन कार्यवाही फिर तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दी गयी। आसार तीन बजे भी सदन एक बार फिर स्थगित होने के ही दिख रहे थे, पर धरना और नारेबाजी जारी रहने पर सभापति हामिद अंसारी ने मार्शल बुलवा कर सातों निलंबित सदस्यों को बलपूर्वक बाहर निकलवा दिया।
उसके बाद भी काफी देर बाद ही सदन सुचारू हो पाया। सरकार बिना चर्चा ही मतदान कराने के मूड में थी, पर मुख्य विपक्षी दल भाजपा जो इस विधेयक का समर्थन कर रही है, के जोर देने पर लगभग तीन बजकर 37 मिनट पर चर्चा शुरू हुई।
विपक्ष के नेता अरुण जेटली द्वारा शुरू की गयी इस चर्चा में माकपा की वृंदा करात, बसपा के सतीश मिश्र और कांग्रेस की जयंती नटराजन समेत कुछ सदस्यों ने भाग लिया। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी चर्चा के जवाब में महिलाओं के सशक्तीकरण के प्रति अपनी सरकार की प्रतिबद्धता जतायी।
जैसे ही मतदान शुरू हुआ बसपा के सतीश मिश्र ने कहा कि उनकी नेता मायावती के दलित, पिछड़ी महिलाओं के सशक्तीकरण के सुझावों को इस विधेयक में शामिल नहीं किया गया है, इसलिए उनकी  पार्टी मतदान का बहिष्कार करती है। उधर मनमोहन सरकार में शामिल दूसरे सबसे बड़े घटक दल तृणमूल कांग्रेस ने मतदान से बहुत पहले ही ऐलान कर दिया  था कि सरकार ने उन्हें विश्वास में लेने के बजाय भाजपा और वाम दलों से चर्चा कर उनका समर्थन लिया है तथा विधेयक में अल्पसंख्यकों ,खासकर मुस्लिमों के हितों का ख्याल नहीं रखा गया है,इसलिए वह मतदान में हिस्सा नहीं लेगी।
राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक पारित करा कर मनमोहन सिंह सरकार ने पहली बड़ी बाधा भले ही पार कर ली हो ,लेकिन जिस तरह उसने अपना समर्थन गंवाया है, उससे भविष्य में ही नहीं, बल्कि वित्त विधेयक पर भी उसकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। समर्थन वापस लेने वाले मुलायम और लालू ने अविश्वास प्रस्ताव लाने का इरादा जता कर खतरे का संकेत भी दे दिया है।

लालू आज लेंगे समर्थन वापस

नयी दिल्ली,9 मार्च (भाषा )। राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने आज कहा कि वे महिला आरक्षण विधेयक के मुद्दे को लेकर संप्रग सरकार से समर्थन वापसी के लिए कल राष्ट्रपति को पत्र सौंपेगे जबकि सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने इस बारे में कुछ भी स्पष्ट नहीं किया। लालू ने संवाददाताओं को बताया कि आज सुबह प्रधानमंत्री से उनकी और यादव की मुलाकात के बावजूद सरकार ने विधेयक पर मतदान कराया। उन्होंने कहा -मैं कल समर्थन वापसी का पत्र राष्ट्रपति को सौंपूगा।

नेता जी कहिन…

महिला आरक्षण विधेयक महिला सशक्तीकरण की दिशा में उठाया गया एक ‘बड़ा कदम’ है। यह अल्पसंख्यक और अनुसूचित जाति और जनजाति विरोधी नहीं है।    -मनमोहन सिंह
भारत के हालिया इतिहास के सर्वाधिक प्रगतिशील विधेयकों में से एक को प्रभावी बनाने का जरिया बनकर हम सभी ऐतिहासिक जिम्मेदारी निभा रहे हैं।    -अरुण जेतली (भाजपा)
कांग्रेस चुनावी घोषणा पत्र में किए गए वादे को पूरा करने में सफल रही है। -जयंती नटराजन (कांग्रेस)
विधेयक से महिलाओं की स्थिति में सुधार होगा और लंबे समय से चली आ रही भेदभाव की स्थिति दूर हो सकेगी।    -वृंदा करात (माकपा)
सवाल नीति और नीयत का है तथा इस संबंध में हमारी नीति और नीयत दोनों स्पष्ट हैं। -नज़मा हेपतुल्ला (भाजपा)
कुछ लोग महिलाओं को गुमराह कर रहे हैं लेकिन संप्रग सरकार ने इस प्रक्रिया की शुरूआत कर इतिहास बनाया है। -प्रभा ठाकुर (कांग्रेस)

घटनाक्रम

वर्ष 1974 : संसद में महिलाओं के प्रतिनिधित्व का मुद्दा भारत में महिलाओं की स्थिति के आकलन संबंधी समिति की रिपोर्ट में पहली बार उठाया गया था। राजनीतिक इकाइयों में महिलाओं की कम संख्या का जिक्र करते हुए रिपोर्ट में पंचायतों तथा स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने का सुझाव दिया गया।
वर्ष 1993 : संविधान में 73वें और 74वें संशोधन के तहत पंचायतों तथा नगरपालिकाओं में महिलाओं के  लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित की गईं।
12 सितम्बर 1996 : महिला आरक्षण विधेयक को पहली बार एच.डी. देवेगौड़ा

सरकार ने 81वें संविधान संशोधन विधेयक के रूप में संसद में पेश किया। उसके कुछ ही दिन बाद देवगौड़ा सरकार अल्पमत में आ गई और 11वीं लोकसभा को भंग कर दिया गया।
विधेयक को भाकपा सांसद गीता मुखर्जी की अध्यक्षता वाली संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा गया। इस समिति ने 9 दिसंबर, 1996 को लोकसभा को अपनी रिपोर्ट पेश की।
26 जून 1998 : भाजपा की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार ने महिला आरक्षण विधेयक को 12वीं लोकसभा में 84वें संविधान संशोधन विधेयक के रूप में पेश किया।
इस बार भी यह विधेयक पारित नहीं हो सका क्योंकि अटल बिहारी वाजपेयी की अगुवाई वाली राजग सरकार अल्पमत में आ जाने की वजह से गिर गई और 12वीं लोकसभा को भंग कर दिया गया।
22 नवम्बर 1999 : दोबारा सत्ता में आई राजग सरकार ने 13वीं लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक को एक बार फिर पेश किया लेकिन इस बार भी सरकार इस पर आमराय नहीं बना सकी। राजग सरकार ने वर्ष 2002 और 2003 में फिर महिला आरक्षण विधेयक पेश किया लेकिन कांग्रेस और वामदलों के समर्थन के आश्वासन के बावजूद सरकार इस विधेयक को पारित नहीं करा सकी।
मई 2004 : कांग्रेस की अगुवाई वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन  ने अपने न्यूनतम साझा कार्यक्रम में महिला आरक्षण विधेयक को पारित कराने के इरादे का एलान किया।
छह मई 2008 : विधेयक राज्यसभा में पेश हुआ और उसे कानून एवं न्याय से सम्बन्धित स्थाई समिति के पास भेजा गया।
17 दिसम्बर 2009 : स्थाई समिति ने अपनी रिपोर्ट पेश की और समाजवादी पार्टी, जनता दल यूनाइटेड तथा राष्ट्रीय जनता दल के विरोध के बीच महिला आरक्षण विधेयक को संसद के दोनों सदनों के पटल पर रखा गया।
22 फरवरी 2010 : राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने संसद में अपने अभिभाषण में कहा कि सरकार महिला आरक्षण विधेयक को जल्द पारित कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
25 फरवरी 2010 : केन्द्रीय मंत्रिमण्डल ने महिला आरक्षण विधेयक को अनुमोदन दिया।
आठ मार्च 2010 : महिला आरक्षण विधेयक को राज्यसभा के पटल पर रखा गया मगर सदन में हंगामे और सपा तथा राजद द्वारा संप्रग से समर्थन वापस लेने की चेतावनी की वजह से उस पर मतदान नहीं हो सका।
9 मार्च 2010 : राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक भारी बहुमत से पारित।


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