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महिलाओं को नहीं मिला तोहफा

Posted On March - 9 - 2010
  • आधी दुनिया महिला दिवस पर भी वंचित
  • प्रधानमंत्री ने आज बुलायी सर्वदलीय बैठक
  • विपक्ष ने किया हंगामा, महिला आरक्षण विधेयक की प्रतियां फाड़ी
  • राज्यसभा छह बार स्थगित, लोकसभा की कार्यवाही भी बाधित
  • लालू, मुलायम ने किया सरकार से समर्थन वापसी का ऐलान
  • भाजपा बिना चर्चा मतदान को तैयार नहीं

राजकुमार सिंह/ट्रिब्यून न्यूज सर्विस
नयी दिल्ली, 8 मार्च। मनमोहन सिंह सरकार अपनी कथनी को करनी में नहीं बदल सकी और सौवें अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर देश की महिलाओं को लोकसभा व विधानसभाओं में एक-तिहाई आरक्षण का तोहफा नहीं दे पायी, पर इस कोशिश की कीमत उसे समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल द्वारा समर्थन वापसी के रूप में चुकानी पड़ी है। इन दलों ने पिछले साल लोकसभा चुनाव के बाद बिना मांगे ही सरकार को बाहर से समर्थन दे दिया था।
भारी हंगामे और अशोभनीय दृश्यों के बीच महिला आरक्षण विधेयक आज राज्यसभा में पेश तो कर दिया गया, पर यादव तिकड़ी के विरोध के चलते मतदान नहीं कराया जा सका और छह बार स्थगन के बाद राज्यसभा की कार्यवाही अंतत: मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी गयी। विरोध कर रहे दलों के सदस्यों ने न सिर्फ विधेयक की प्रति फाड़ कर  सभापति हामिद अंसारी पर फेंकी, बल्कि उनकी मेज पर चढऩे की भी कोशिश की।
आज लोकसभा भी नहीं चल पायी और चार बार के स्थगन के बाद अंतत: कल तक के लिए स्थगित कर दी गयी। अब  इस विधेयक पर राज्यसभा में मंगलवार को मतदान होने की संभावना है, पर विधेयक का भविष्य बहुत कुछ उसी दिन सुबह प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा बुलायी गयी सर्वदलीय बैठक पर भी निर्भर करेगा।
मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी, लालू प्रसाद यादव के राष्ट्रीय जनता दल और मायावती की बहुजन समाज पार्टी ने पहले ही ऐलान कर दिया था कि मौजूदा स्वरूप में उन्हें महिला आरक्षण विधेयक मंजूर नहीं है। हालांकि बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने , संभवत: आसन्न विधानसभा चुनावों के मद्देनजर , विधेयक के समर्थन का ऐलान किया था, पर जनता दल यूनाइटेड के अध्यक्ष शरद यादव विरोध पर अडिग हैं। ये सभी दल चाहते हैं कि महिलाओं के लिए  आरक्षित की जानेवाली 33 प्रतिशत सीटों में दलित, पिछड़ी, आदिवासी और अल्पसंख्यक महिलाओं के लिए भी आरक्षण का स्पष्ट प्रावधान किया जाये। आरक्षण के अंदर आरक्षण की इन दलों की मांग को दरकिनार कर सरकार ने महिला आरक्षण विधेयक को उसी स्वरूप में पारित कराने का इरादा जताया था,जिस रूप में संसद की स्थायी समिति और फिर केबिनेट ने मंजूरी दी थी। सरकार ने यह इरादा भी जता दिया था कि वह आठ मार्च को सौवें अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर ही महिलाओं को आरक्षण का तोहफा देने का इरादा रखती है। प्रधानमंत्री समेत सरकार की ओर से सभी दलों से इस विधेयक के समर्थन की  अपील तो की गयी लेकिन विरोध पर आमादा दलों को मनाने की कोई कोशिश नहीं की गयी। सरकार के रणनीतिकारों का मानना था कि भाजपा, वाम मोर्चा, तेलुगु देशम्, शिरोमणि अकाली दल और अन्नाद्रमुक सरीखे विपक्षी दलों के समर्थन के चलते विधेयक पारित कराना मुश्किल नहीं होगा, हालांकि नियमानुसार मतदान के समय सदन का पूरी तरह व्यवस्थित होना जरूरी है। दरअसल सरकार की मुश्किलें आज संसद की कार्यवाही शुरू होते ही शुरू हो गयीं। राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही सपा, राजद और लोजपा के सदस्यों ने रंगनाथ मिश्र आयोग  की रिपोर्ट पर बहस करने की मांग करते हुए हंगामा शुरू कर दिया।
सभापति हामिद अंसारी ने यह कहते हुए सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी कि इसके लिए नोटिस नहीं दिये गये हैं। 12 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही फिर वही हंगामा होने लगा तो सभापति ने सदन दो बजे तक के लिए स्थगित कर दिया, पर दो बजे सदन की कार्यवाही शुरू होने पर कुछ ऐसे दृश्य भी नजर आये जो संसद और लोकतंत्र को कलंकित करनेवाले हैं।
अपना आसन संभाल कर सभापति ने जैसे ही केंद्रीय कानून मंत्री वीरप्पा मोइली को महिला आरक्षण विधेयक पेश करने को कहा और मोइली ने विधेयक सदन के पटल  पर रखा, सपा, राजद और लोजपा के सदस्य नारेबाजी करते हुए अंसारी की ओर बढऩे लगे। इन उत्तेजित सदस्यों ने विधेयक की प्रति छीनते हुए फाड़ कर सभापति पर फेंक दी। सपा के सदस्य नंदकिशोर यादव ने तो उनकी मेज पर भी चढऩे की कोशिश की,जिसे सदन के सुरक्षाकर्मियों ने नाकाम कर दिया। लालू यादव के साले सुभाष यादव राज्यसभा महासचिव की ओर बढ़ते देख्ेा गये।
इसके बाद सभापति ने सदन तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। उत्तेजित लालू और मुलायम तत्काल बाहर आ कर संसद परिसर में मीडिया से मुखातिब हुए और इस तरह जबरन विधेयक पेश करने को राजनीतिक डकैती करार देते हुए मनमोहन सिंह सरकार से समर्थन वापस लेने का ऐलान कर दिया। तीन बजे कार्यवाही श्ुारू होते ही हंगामा देख उप सभापति ने सदन की कार्यवाही पहले चार बजे तक और फिर चार बजे सदन शुरू होने पर शाम छह बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
संकेत दिया गया कि सरकार बिना चर्चा ही  शाम छह बजे  मतदान करा कर इस विधेयक को पारित कराने पर आमादा है और हंगामा करनेवाले सदस्यों को नियंत्रित करने के लिए सदन में मार्शल भी बुलाये जायेंगे,लेकिन जैसे ही भाजपा ने कहा कि बिना चर्चा वह मतदान में भाग नहीं लेगी तो सरकार का सारा जोश ठंडा पड़ गया और राज्यसभा की कार्यवाही जैसे ही शाम छह बजे शुरू हुई उप सभापति ने सदन मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।
राजनीतिक प्रेक्षक आज के घटनाक्रम को मनमोहन सिंह सरकार की किरकिरी मान रहे हैं, जो महिला आरक्षण विधेयक को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की प्रतिबद्धता के रूप में प्रचारित कर रही थी। वैसे दिलचस्प यह है कि आखिरी क्षणों में भाजपा द्वारा बिना चर्चा मतदान में भाग लेने से इनकार पर कांग्रेसी खेमे में भी राहत देखी गयी। एक कांग्रेसी नेता ने तो टिप्पणी भी की कि चलो भाजपा ने हमें उबार लिया।


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