‘नार्को टेररिस्ट' अमित गंभीर उर्फ ‘बॉबी' के खिलाफ पहला आरोपपत्र दाखिल !    सीतारमण ने एफएसडीसी बैठक में लिया अर्थव्यवस्था की स्थिति का जायजा !    ब्रिटेन में भारतीय मूल के 2 व्यक्तियों को ड्रग्स बरामदगी मामले में 34 साल की सजा !    बाबरी मस्जिद : 4 जून को भाजपा नेताओं के बयान होंगे दर्ज !    केरल में 2 महीने बाद शराब बिक्री शुरू, बेवक्यू ऐप से लेना होगा टोकन! !    आइसोलेशन सेंटरों में अलग से खाना-पानी मुहैया कराये दिल्ली सरकार : हाईकोर्ट !    सुप्रीमकोर्ट ने श्रमिक पलायन संकट पर केन्द्र से पूछे तीखे सवाल !    शराब कारोबारी ने पत्नी, बच्चों के लिये पूरा हवाई जहाज लिया किराये पर! !    दिल्ली के किसान ने श्रमिकों को विमान से भेजा पटना, प्रवासियों ने डर से बंद कर ली आंखें! !    चीनी अधिकारियों पर प्रतिबंधों को मंजूरी, अमेरिका करेगा रुख कड़ा !    

बाल कविताएं

Posted On March - 24 - 2010

अप्रैल फूल
अप्रैल फूल के दिन,
बंदर के आया मन में।
गधे को बनाता हूं फूल,
वही मूर्ख है वन में।
गधे को दिया न्यौता,
कहा, ‘आज घर आना।
दावत दे रहा हूं सबको,
पकवान बने हैं ना ना।’
सुनकर गधा गदगद हुआ,
मुंह से टपकी लार।
पहना कोट, बांधी टाई,
खूब किया शिंगार।
तय समय पर पहुंच गया,
वह बंदर के घर।
देखा जब सिर चकराया,
ताला था द्वार पर।
शर्मसार सा हुआ गधा,
मुंह में बुदबुदाया।
‘आज तो है अप्रैल फूल,
बंदर ने खूब बनाया।’
— हरिन्द्र सिंह गोगना


पिंक सिटी की सैर

आओ बच्चो तुम्हें घुमाऊं,
पिंक सिटी की सैर कराऊं।
रजवाड़े महाराजाओं के महल,
और दिखाऊं हवा महल।
हवामहल में ऐसा संग्रहालय,
ऐतिहासिक धरोहर का विद्यालय।
यह देखो अलबर्ट हाल,
यहां सड़कों का बिछा है जाल।
जयगढ़ किले की देखो शान,
यहां रखी देश की बड़ी तोप जयबाण।
यहां की दस्तकारी व मीनाकारी,
देश-विदेश को लगती प्यारी।
यह सबसे ऊंची इमारत इसरकोट,
देख इसे हो जाओ लोटपोट।
देखो यह है जंतर मंतर,
कैसे कैसे लगे यहां यंत्र।
-ईश्वर सिंह खिच्ची


मेरा गांव
मेरा प्यारा सुन्दर गांव,
मीठी है पीपल की छांव।
सुख देते हैं रो•ा असीम,
आंगन में बरगद और नीम।
इक मैदान सा मेरा आंगन,
खेत हैं, चारों ओर है मधुबन।
मंदिर है तालाब किनारे,
लोग हैं भोले-भाले सारे।
शहर के शोरोगुल से दूर,
इसमें जीवन है भरपूर।
-गुलशन मदान


नकल का फल
मुन्ना ने तोते को देखा मिर्ची बहुत था खाता,
एक दिन सोचा मुन्ना ने मैं भी हूं इसे चबाता।
एक बड़ी सी मिर्ची तब मुन्ना ने मुंह में रखी,
और चबाया जैसे ही तब मुंह से सी-सी निकली।
प्रण किया उस दिन मुन्ना ने नकल नहीं करने का,
जैसा कोई कहता-करता वैसा नहीं करने का
-दिनेश लखेड़ा


Comments Off on बाल कविताएं
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
Both comments and pings are currently closed.

Comments are closed.

Powered by : Mediology Software Pvt Ltd.