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बजट में सकारात्मक सोच

Posted On March - 11 - 2010

हरियाणा सरकार के वर्ष 2010-11 के लिए प्रस्तुत बजट में यूं तो कोई क्रांतिकारी पहल नज़र नहीं आती लेकिन सामाजिक कल्याण की दृष्टिï से घोषित कतिपय योजनाएं उम्मीद ज़रूर जगाती हैं। यूं तो बजट सरकार के आंकड़ों की बाजीगरी ही कहा जाता है क्योंकि इसके क्रियान्वयन तक अनुमानित खर्च और आय स्रोतों के बारे में सटीक आकलन कर पाना संभव नहीं हो पाता। राज्यों के बजट जहां राष्टï्रव्यापी आर्थिक परिवर्तनों व अंतर्राष्टï्रीय उतार-चढ़ाव से प्रभावित होते हैं वहीं मानसून की लुका-छिपी तक बजट को प्रभावित करती है। हरियाणा सरकार के मौजूदा बजट में जहां मंदी की छाया और उससे उबरने की कोशिश नज़र आती है, वहीं मंदी के दीर्घकालीन प्रभावों से मुक्त होने की इच्छा में सरकार द्वारा घोषित प्रोत्साहन पैकेज एक सकारात्मक कोशिश है। राज्य सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए 332.56 करोड़ राशि आवंटित की थी, वहीं वर्ष 2010-11 के  लिए 713.79 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। अच्छी बात यह है कि आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज के तहत जि़ला अस्पतालों के उन्नयन, नये चिकित्सा महाविद्यालयों की स्थापना, शहरी क्षेत्रों में जलापूर्ति एवं स्वच्छता की सुविधाओं पर यह राशि खर्च की जाएगी। लेकिन चिंताजनक बात यह है कि राज्य का राजस्व घाटा लगातार बढ़ रहा है। यह अलग बात है कि राज्य का योजनागत खर्च भी बढ़ा है। बकौल वित्तमंत्री राज्य की प्रति व्यक्ति आय  में 13 फीसदी की वृद्धि हुई है, जो कि एक सकारात्मक संकेत है, क्योंकि यह गोवा के बाद राष्टï्रीय स्तर पर दूसरे नंबर पर आती है। इस बजट को विपक्ष निराशाजनक और वैट पर सरचार्ज लगाने से महंगाई बढ़ाने वाला बता रहा है।
हरियाणा की वार्षिक योजना में  शहरी व ग्रामीण निकायों की वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए वैट पर जो दशमलव 25 प्रतिशत का अधिभार लगाया गया है, उससे तीन सौ करोड़ रुपए का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होने की उम्मीद है। सरकार की योजना है कि खस्ताहाल शहरी स्थानीय निकायों के लिए इस राशि का 80 फीसदी तथा 20 फीसदी राशि पंचायतों को दी जाएगी। उम्मीद की जानी चाहिए कि इससे जहां स्थानीय निकायों की हालत सुधरेगी, वहीं नयी परियोजनाओं को  शुरू करने में भी मदद मिलेगी। इसके अलावा स्कूल एवं उच्च शिक्षा के लिए 11.53 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 5946 करोड़ तथा तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा के लिए 431.12 करोड़ रुपये की वृद्धि का जो प्रावधान रखा गया है, उम्मीद है उससे शिक्षा के लक्ष्यों को  पाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा बजट में कृषि के लिए 1073 करोड़, ऊर्जा क्षेत्र के लिए 4642.71 करोड़, सिंचाई क्षेत्र 1616.49 करोड़, जलापूर्ति एवं स्वच्छता के लिए 1297.69 करोड़, शहरी विकास के लिए 1447 करोड़ रुपए की वृद्धि का जो प्रावधान रखा गया है, उससे सरकार की सामाजिक कल्याण के  लिए प्रतिबद्धता नज़र आती है। सतही तौर पर तो बजट कल्याणकारी नज़र आता है लेकिन महत्वपूर्ण यह है कि योजनाओं का क्रियान्वयन कितनी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ किया जाता है।


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