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तारों को कैसे मापा जाता है?

Posted On March - 13 - 2010

”दीदी, पृथ्वी के जो सबसे करीब तारा है वह भी साढ़े चार लाइट-ईयर्स या प्रकाशवर्ष की दूरी पर है। एक प्रकाश वर्ष लगभग 6,000,000,000,000 मील का होता है। अब अगर तारे इतनी दूरी पर हैं तो हम यह कैसे माप सकते हैं कि वह कितने बड़े हैं, वह किस चीज के बने हैं, वगैरह-वगैरह।’
”एक समय था जब खगोलशास्त्रियों के पास केवल एक ही यंत्र था- टेलिस्कोप। आज उनके पास विशेष यंत्र मौजूद हंै जिनकी मदद से तारों की गति, चमक, रंग, तापमान और वह किस चीज से बने हैं का अध्ययन किया जा सकता है।”
”यह विशेष यंत्र कौन-कौन से हैं?”
”एक कैमरा है जिससे तारों का स्थायी रिकार्ड तैयार किया जाता है। दूसरा स्पैक्टोग्राफ है जिससे तारों के सपैक्ट्रा या उनसे आने वाली रोशनी को फोटोग्राफ किया जाता है। स्पैक्ट्रोग्राफी की मदद से ही खगोलशास्त्रियों यानी ड्डह्यह्लह्म्शठ्ठशद्वद्गह्म्ह्य ने जाना है कि तारे किस पदार्थ से बने हैं, उनका तापमान क्या है और वह किस गति से चल रहे हैं।”
”स्पैक्ट्रोग्राफ से यह मापन किस तरह से होता है?”
”एक तारे का स्पैक्ट्रम दूसरे तारों जैसा हो सकता है। हर स्पैक्ट्रम प्लस में जो तारे होते हैं उनका रंग समान होता है। यह रंग नीले से लाल तक होते हैं। हमारा सूरज पीला तारा है, जो बीच की श्रेणी में आता है। स्पैक्ट्रम में रंग मापने से तारे का तापमान भी मालूम हो जाता है। नीले तारे बड़े, गर्म और चमकदार होते हैं और उनका तापमान 25,000 डिग्री सेंटीग्रेड या अधिक होता है। लाल तारे ठंडे होते हैं और उनका तापमान 1600 डिग्री या कम होता है।”
”तारों के रसायनिक तत्वों को जानने के लिए खगोलशास्त्री उनके स्पैक्ट्रा की तुलना प्रयोगशाला में बने स्पैक्ट्रा से करते हैं। तारों पर पाये जाने वाले सभी तत्व पृथ्वी पर भी मौजूद हैं, लेकिन तारे बुनियादी तौर पर बहुत गर्म गैस के गोले होते हैं, विशेषकर हाइड्रोजन और हीलियम के
”क्या और भी यंत्रों का प्रयोग होता है?”
”हां, विशेष किस्म के टेलिस्कोप, जिनसे आसमान के बड़े हिस्सों को फोटोग्राफ किया जाता है। एक अन्य यंत्र रेडियो टेलिस्कोप है जिसमें बहुत बड़ा एंटिना, रिसीवर और रजिस्ट्रिंग मीटर होता है। यह यंत्र तारों और ग्रहों से आने वाली रेडियो तरंगों की क्षमता रिकार्ड करता है। इस तरह विभिन्न किस्म के यंत्रों से दूर गगन में स्थित तारों के बारे में जानकारी हासिल की जाती है।”


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