पराली से धुआं नहीं अब बिजली बनेगी !    विवाद : पत्नी को पीट कर मार डाला !    हरियाणा : कांग्रेस पहुंची चुनाव आयोग !    बाबर की ऐतिहासिक भूल सुधारने की जरूरत : हिन्दू पक्ष !    आतंकियों की घुसपैठ कराने की कोशिश में पाकिस्तान !    आस्ट्रेलियाई महिला टी20 टीम को पुरुष टीम के बराबर मिलेगी इनामी राशि !    पनामा लीक : दिल्ली हाईकोर्ट ने मांगी स्टेटस रिपोर्ट !    हादसे में परिवार के 3 सदस्यों समेत 5 की मौत !    पुलिस स्टेट नहीं बन रहा हांगकांग : कैरी लैम !    प्रदर्शन के बाद खाताधारक की हार्ट अटैक से मौत !    

तनिष्ठा : अब मसाला फिल्मों का रुख

Posted On March - 13 - 2010

हिंदी सिनेमा के दर्शक तनिष्ठा चटर्जी के नाम से शायद बहुत अधिक वाकिफ नहीं हैं, लेकिन तनिष्ठा के बारे में इतना बताना ही काफी होगा कि उनके अभिनय की चमक देश की सरहदों के पार भी देखी जा सकती है। ‘ब्रिक लेन’ और ‘शैडोज ऑफ टाइम’ जैसे इंटरनेशनल प्रोजेक्ट में काम कर चुकी तनिष्ठा जल्द ही ‘किल बिल’ फेम लूसी लियू की बतौर निर्देशक पहली फिल्म में लीड रोल में नजर आएंगी। 2003 में आई हिंदी फिल्म ‘स्वराज’ से अपने अभिनय के सफर की शुरुआत करने वाली तनिष्ठा ने अपनी पहली ही फिल्म के लिए नेशनल अवार्ड जीतकर अभिनय की दुनिया में धमाकेदार एंट्री की थी। इन दिनों तनिष्ठा देव बेनेगल की फिल्म ‘रोड मूवी’ को लेकर चर्चा में हैं। जल्द रिलीज होने वाली इस फिल्म में वे अभय देओल के अपोजिट नजर आएंगी।
अपनी फिल्म ‘रोड’ की चर्चा करते हुए तनिष्ठा कहती हैं, ‘फिल्म के टाइटल से ही जाहिर है कि यह एक रोड फिल्म है। यह विष्णु नाम के एक लड़के की कहानी है, जो अपने हिसाब से जि़ंदगी जीना चाहता है। जिंदगी की इसी तलाश में वह एक पुराना ट्रक लेकर निकल पड़ता है। इस सफर में उसकी मुलाकात मोहम्मद फैजल उस्मानी से होती है। इसके साथ ही कहानी आगे बढ़ती है। भले ही यह फिल्म इंडिया में रिलीज हो रही है और इसकी कहानी हिंदुस्तानी हो, लेकिन इसमें एक इंटरनेशनल अपील है। अभी कुछ दिनों पहले ही हमने टोरंटो में इस फिल्म की स्क्रीनिंग की थी। वहां ज्यादातर ऑडियंस इंडियन थे और उन्हें यह फिल्म बहुत पसंद आई।’
फिल्म में तनिष्ठा ने एक बंजारन का रोल किया है, एक ऐसी बंजारन, जो गुजरात में भी हो सकती है, तो न्यूयॉर्क मे भी। खास बात यह है कि इस किरदार का कोई नाम नहीं है। तनिष्ठा कहती हैं, ‘मेरी जि़ंदगी भी बंजारन जैसी ही रही है, इसलिए यह किरदार मेरी असल जि़ंदगी के बहुत करीब है। पिताजी इंजीनियर हैं और वो एक जापानी कंपनी में काम करते थे। इसलिए पापा की नौकरी की वजह से हमें ऑस्टे्रलिया, केन्या, जापान जैसे अलग-अलग देशों में रहना पड़ा। आज भी मैं न्यूयॉर्क और दिल्ली के बीच झूलती रहती हूं। देव बेनेगल ने जब मुझे यह स्क्रिप्ट सुनाई, तभी मेरे दिल से एक आवाज आई कि यह किरदार निभाना मेरे लिए अपनी जि़ंदगी के पन्ने पलटने जैसा होगा।’ तनिष्ठा बंगाली परवरिश से हैं और इस परिवेश की खूबी है कि यहां बच्चों की एकेडमिक एजुकेशन प्रोफेशनल होती है, लेकिन उन्हें म्यूजिक, ड्रामा, पेंटिंग जैसी कलाएं भी सिखाई जाती हंै। तनिष्ठा ने भी पढ़ाई के साथ इंडियन क्लासिकल म्यूजिक सीखा। उन्होंने दिल्ली से कैमिस्ट्री में गे्रजुएशन किया। वे कहती हैं, ‘बचपन में एक्टे्रस बनने की बात तो कभी नहीं सोची थी, लेकिन मैं गाती थी। मुझे बहुत देर से इस बात का एहसास हुआ कि मैं एक्टिंग कर सकती हूं। एक दिन एनएसडी में वर्कशॉप करने गई थी,वहां लोगों ने मुझसे कहा कि मैं एक अच्छी एक्टर बन सकती हूं। इसके बाद से मेरी लाइफ 360 डिग्री चेंज हो गई। मम्मी-पापा को भी डर था कि मैं क्या करूंगी और मैं उनका डर अच्छी तरह समझ सकती हूं। पर धीरे-धीरे मुझे इसी काम में मजा आने लगा।’
तनिष्ठा ने हॉलीवुड और बॉलीवुड दोनों जगह काम किया है। दोनों में कितना अंतर उन्हें नजर आता है? इस सवाल के जवाब में वे कहती हैं, ‘खुशकिस्मती से मुझे अलग-अलग जगह काम करने और वहां के कल्चर को समझने का मौका मिला है। एक हद तक मैं मोबाइल बन गई हूं। जहां तक हॉलीवुड और बॉलीवुड में फर्क का सवाल है, तो तकनीक और बजट के लिहाज से भले ही हॉलीवुड हमसे आगे है, लेकिन क्रिएटिविटी के मामले में बॉलीवुड किसी से कम नहीं है।’
आम तौर पर बॉलीवुड की फिल्म इंडस्ट्री में हीरोइन को एक सेक्स सिंबल के रूप में पेश किया जाता है और कुछेक फिल्मों को छोड़ दिया जाए, तो ज्यादातर फिल्मों में हीरोइन का काम नायक के साथ नाचने और गाने से अलग नहीं होता। लेकिन तनिष्ठा इस बात से पूरी तरह सहमत नजर नहीं आतीं। वे कहती हैं, ‘बीच में एक दौर ऐसा आया था, जब बॉलीवुड में हीरोइनों का काम सिर्फ नाचना-गाना या बदन दिखाना ही रह गया था। लेकिन धीरे-धीरे बॉलीवुड बदल रहा है, सोसायटी और इकोनॉमिक डिवेलपमेंट के साथ फिल्म बनाने का तरीका और सबजेक्ट भी बदल रहे हैं। मीना कुमारी, नरगिस, श्रीदेवी और माधुरी दीक्षित जैसी अभिनेत्रियों ने पुरुष प्रधान हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अपनी एक खास जगह कायम की है और लोग उनके लिए फिल्म देखने जाते थे। मेरा मानना है कि मेल हो या फीमेल—ऑडियंस के साथ कनेक्शन होना जरूरी है। हाल के दौर में भी ‘इश्किया’, ‘फैशन’ और ‘फिराक’ जैसी फीमेल ओरिएंटेड फिल्में बनी हैं, लेकिन ये गिनी-चुनी होती हैं। मैंने ज्यादातर फीमेल ओरिएंटेड फिल्में की हैं और इंडस्ट्री में फीमेल डायरेक्टर्स भी आगे आ रही हैं। लेकिन अभी हमें एक-दो साल और इंतजार करना पड़ेगा।’

अब तक तनिष्ठा ने संजीदा किरदार ही प्ले किए हैं। लेकिन कॉमर्शियल फिल्मों के बारे में भी उन्होंने अपने विकल्प खुले रखे हैं। जैसा कि वे कहती हैं, ‘मैंने अब तक कोई मसाला फिल्म नहीं की है, लेकिन अब मैं ऐसी फिल्में भी करना चाहती हूं। दिवाकर बनर्जी, शिमित अमीन, राकेश मेहरा और विशाल भारद्वाज की फिल्में मुझे बहुत पसंद हैं। फिलहाल मैं हॉलीवुड स्टार मार्टिन शीन के साथ भोपाल गैस कांड पर बनने वाली एक फिल्म ‘भोपाल: प्रेयर फॉर रैन’ कर रही हूं। इसके अलावा एक और फीमेल ओरिएंटेड फिल्म कर रही हूं, जिसकी शूटिंग बहुत जल्द जैसलमेर में शुरू होने वाली है।’

रेखा


Comments Off on तनिष्ठा : अब मसाला फिल्मों का रुख
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
Both comments and pings are currently closed.

Comments are closed.

Powered by : Mediology Software Pvt Ltd.