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गुटरगूं

Posted On March - 13 - 2010

टीवी पर अब साइलेंट सीरियल

बिना कुछ कहे कहेगा बहुत कुछ

”गुटरगूं”

यह अच्छी बात है कि सब टीवी अक्सर कुछ अलग और लीक से हटकर करने की कोशिशों में जुटा रहता है। उसकी यह कोशिश इस बार एक नए सीरियल ‘गुटरगूं’ के रूप में सामने आई है। इस सीरियल की खास बात यह है कि यह एक साइलेंट कॉमेडी सीरियल है यानी सीरियल में कोई भी डॉयलॉग नहीं होगा पर कलाकार अपने हाव-भाव से सारी बात समझाते चले जाएंगे जैसा कि मूक फिल्मों के युग में होता था।
एक मूक हास्य धारावाहिक यानी साइलेंट कॉमेडी सीरियल के रूप में हमारे यहां ‘मिस्टर बीन’ जैसे विदेशी सीरियल अच्छे खासे लोकप्रिय हुए हैं। चैनल का दावा था कि ‘गुटरगूं’ देश का पहला साइलेंट सीरियल है और इस बात का प्रचार भी चैनल जोर-शोर से कर रहा था। पर जब मैंने चैनल के बिजनेस हैड अनुज कपूर और सीरियल के निर्माता बीपी सिंह को बताया कि उनका यह दावा गलत है क्योंकि लगभग 14 बरस पहले दूरदर्शन पर ‘मिस्टर फंटूश’ नाम से पहले भी एक साइलेंट सीरियल आ चुका है जिसे राजेश पुरी ने बनाया था और उसमें राजेश पुरी के साथ तनाज करीम और लिलीपुट ने काम किया था। तब अनुज कपूर ने कहा हमें इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी, आपने बताया है तो हम इसे देश का पहला साइलेंट सीरियल न कहकर देश का पहला सेटेलाइट साइलेंट सीरियल कहेंगे और चैनल ने अब ऐसा कर भी दिया है।
सीरियल के निर्माता बीपी सिंह इससे पहले सोनी चैनल के सुपर हिट सीरियल ‘सीआईडी’ के लिए जाने जाते हैं उनका यह पहला कॉमेडी सीरियल है। बीपी सिंह कहते हैं—’हमने यह जानने के लिए गूगल सहित कई जगह सर्च किया कि क्या हमारे से पहले कोई साइलेंट सीरियल टीवी पर आया है लेकिन हमें वहां ऐसा कोई सीरियल नहीं मिला। आपने यह जानकारी दी इसके लिए हम आपके आभारी हैं।
‘गुटरगूं’ में भावना बलसावर, सुनील ग्रोवर, शीतल मौलिक, नयन भट्ट, जयदत ब्यास, केके गोस्वामी, दया शेट्टी और मास्टर जय ठक्कर प्रमुख भूमिकाओं में हैं। भावना बलसावर टीवी की पुरानी एक्ट्रेस हैं, जो ‘देखभाई देख’ और ‘जबान संभाल कर’ जैसे सीरियल के कारण काफी लोकप्रिय हुई थी। जबकि सुनील ग्रोवर ‘कौन बनेगा चम्पू’ के होस्ट के रूप में तो मशहूर हुए ही जिसमें सुनील ने शाहरुख खान की जबरदस्त कॉपी की। इसके अलावा वह और भी कुछ कॉमेडी सीरियल में अपने अभिनय के जौहर दिखा चुके हैं। दूसरी ओर नयन भट्ट ‘कहानी घर-घर की’ में पार्वती की सास का रोल करके अपनी दिलकश पहचान बना चुकी हैं। अन्य कलाकार भी पहले किसी न किसी सीरियल में आते रहे हैं।
सीरियल का नायक बालू कुमार सुनील ग्रोवर है। यह सीधा-सादा प्यारा-सा व्यक्ति जब भी कोई काम करता है तब कुछ न कुछ ऐसा हो जाता है जिससे बखेड़ा खड़ा हो जाता है। बालू के परिवार में उसकी पत्नी स्मिता के साथ उसके पिता जय कुमार, मां बबीता कुमार और दादी भी रहती हैं। सभी के अपने-अपने तौर-तरीके और अपनी-अपनी आदतें हैं।
दादी (नयन भट्ट) परिवार का सबसे बड़ा सदस्य होने के कारण सभी की चहेती हैं। हालांकि वह आधुनिक है और कामकाज में मेहनत करती हैं लेकिन कानों में ‘हियरिंग एड’ पहने बिना कुछ भी नहीं सुन पाती चाहे कोई धमाका क्यों न हो जाए। उधर घर की दो अन्य महिलाओं में बालू की मां बबीता (भावना बलसावर) अपने बेटे पर हमेशा गर्व करती हैं चाहे उसके कारनामें पड़ोसियों को क्यों न हिला दे। उसके पति काफी सख्त हैं पर बबीता पति परमेश्वर के फार्मूले पर चलती है। जबकि बालू की पत्नी स्मिता (शीतल) अपने पति की तो प्रिय है पर अपनी सास के लिए कोई न कोई मुसीबत पैदा करना उसे बेहद पसंद है। स्मिता का सबसे ज्यादा समय अपने लुक और अपनी फिटनेस पर रहता है। अब बात करें बालू के पिता जय कुमार और घर के नौकर पप्पू महाराज की। लेफ्टिनेंट कर्नल जयकुमार को सेना से रिटायर हुए काफी दिन हो गए हैं पर अनुशासन और सिद्धांत आज भी उसके लिए सर्वोपरि हैं। हर काम को ढंग से और जल्दी करने और कराने का जुनून उन पर हमेशा सवार रहता है। अपनी इसी आदत के चलते अपने बेटे की आदतें उन्हें रास नहीं आतीं। जबकि घर का रसोइया पप्पू महाराज है तो बौना पर उसके सपने आकाश छूते हैं। बालू के लिए स्वामीभक्ति उसमें कूट-कूट कर भरी है और वह खाना भी अच्छा बनाता है, यह बात अलग है कि कभी-कभी उसके नए प्रयोग खाने को अजब-गजब रंग दे देते हंै।
इस परिवार के साथ इस कहानी के दो और मुख्य पात्र उनके पड़ोस से हैं। यह हैं हरप्रीत और उनका बेटा चीकू। हरप्रीत एक पहलवान है, बात-बात पर गुस्सा आना और लडऩा उसकी रोज की आदत है। हालांकि, उसमें दिमाग तो शायद है ही नहीं पर बाइक से उसे बेहद प्यार है। उसके बेटे चीकू में भी पिता की आदतें हैं और ये दोनों बालू और उसके परिवार के लिए हर वक्त नाक में दम साबित होते हैं।
इस सीरियल का नाम पहले ‘सब चुप रहो’ रखा गया था पर बाद में ‘गुटरगूं’ कर दिया गया। अनुज कपूर कहते हैं—’वह वर्किंग टाइटल था, हमें यह बेहतर लगा’। बीपी सिंह कहते हैं—इस सीरियल को बनाने के बाद मैंने पाया कि सीआईडी बनाना आसान है, ‘गुटरगूं’ बनाना मुश्किल। सीरियल के निर्देशक प्रबाल बरुआ कहते हैं—हमने पूरी कोशिश की है कि कलाकार बिना कुछ बोले सभी कुछ कह जाएं। हम इस सीरियल को बनाने में एन्जॉय कर रहे हैं। उम्मीद है दर्शक इसे देखकर एंज्वॉय करेंगे।
उधर सुनील ग्रोवर कहते हैं—जब हम रेडियो सुनते हैं तो सिर्फ सुनाई देता है और जब ‘गुटरगूं’ देखेंगे तो सिर्फ दिखाई देगा। भावना बलसावर कहती हैं—मैंने हमेशा ज्यादा बोलने वाली लड़की का किरदार निभाया है पर इस बार बिल्कुल भी न बोलने वाला रोल मिला है।
आधे घंटे के इस सीरियल को 5 मार्च से हफ्ते में एक दिन शुक्रवार रात साढ़े 8 बजे का प्रसारण समय दिया है। इसके हर एपिसोड में एक अलग कहानी है जो बालू परिवार पर ही केन्द्रित रहेगी। अनुज कपूर कहते हैं—यदि यह दर्शकों को पसंद आया तो हम इसे हफ्ते में दो दिन भी कर सकते हैं। फिलहाल इसके 26 एपिसोड हैं। यदि यह पसंद किया गया तो इसे आगे भी जारी रखा जाएगा।

प्रदीप सरदाना


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