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आपके पत्र

Posted On March - 10 - 2010

महिला दिवस का औचित्य

चन्द्रकला, खातोद, महेंद्रगढ़
सदियों से नारी के कई रूपों का गुणगान होता आया है। नारी कभी मंदिर की देवी बनी, तो कभी कवि की कल्पना, तो कभी किसी शिल्पकार की अद्ïभुत प्रेरणा। आधुनिक कही जाने वाली इस 21वीं सदी में भी नारी के नसीब में कोई व्यापक अंतर नहीं आया है। आज भी नारी उतनी ही प्रताडि़त है। आज भी पुरुष समाज उस पर हावी है। तमाम प्रयासों और आंदोलनों के बावजूद आलम जस का तस है। महिला दिवस के दिन हम महिलाओं के सम्मान में बड़े-बड़े भाषण देते हैं बाकी दिन हम इनके शोषण के अवसर तलाशते हैं। यही हमारा आधुनिक चरित्र और महिलाओं के प्रति सम्मान है। आज महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अत्याचारों के खिलाफ कोई आंदोलन क्यों नहीं होता? क्यों नहीं हमारी न्यायपालिका और प्रशासन पीडि़त महिला को न्याय दिला पाता? इस दिन कम से कम इस यक्ष प्रश्न का हल ढूंढऩे की कोशिश करनी चाहिए तभी महिला दिवस मनाने का औचित्य होगा।

अल्पसंख्यकों को खतरा

प्रो. शामलाल कौशल, रोहतक
23 फरवरी का संपादकीय ‘अमानवीयता की हद’, में पाकिस्तान के सीमांत उत्तरी पश्चिमी क्षेत्र में तालिबान आतंकवादियों द्वारा सिखों के सिर कलम कर देने से यह संदेश मिला कि वहां अल्पसंख्यकों को खतरा है। आज वहां अल्पसंख्यक लोग नारकीय जीवन व्यतीत कर रहे हैं। कुछ समय पहले सिखों से जजिया कर लिया गया। लगभग 10 सिखों का आतंकवादियों ने अपहरण कर लिया तथा 3 करोड़ की फिरौती न देने के कारण उनमें से चेतावनी के तौर पर दो का सिर धड़ से अलग करके फेंक दिया गया। वहां कोई भी सरकारी फरमान को नहीं मानता। लेकिन अफसोस की बात है कि अब सिखों के पाकिस्तान में इस तरह से बेदर्दी से मारे जाने पर लगभग खामोशी है। सरकार को इस ओर कड़ा रुख अपनाना चाहिए।

मौत का प्रचार

सत्यनारायण नेहरा, मोहब्बतपुर, हिसार
भारत सरकार जहां नशा विरोधी कानून पारित करके नशा विरोध की आहें भर रही है, वहीं हरियाणा रोडवेज की बसों के दोनों तरफ नशों की सामग्री के बड़े-बड़े विज्ञापन हमें देखने को मिलते हैं। तम्बाकू उत्पाद—चैनी खैनी, तलब, पान-मसाला की मनमोहक तसवीरें प्रमुख हैं। बस के अन्दर जहां नशा कानूनन अपराध लिखा गया है वहीं बस के बाहर कानून की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सरकार तथा परिवहन विभाग को इस तरफ कारगर कदम उठाए जाने की सख्त जरूरत है।

सचिन है भारत-रत्न

सालगराम चौधरी, चपैहर, कालका
दोहरे शतक के बाद सचिन तेंदुलकर को भारत-रत्न देने की मांग ने काफी जोर पकड़ा है। सचिन ने क्रिकेट के क्षेत्र में इतने रिकार्ड बनाए हैं कि उन्हें समय-समय पर उचित सम्मान से नवाजा गया है। अब सचिन को भारत-रत्न मिलना ही चाहिए। सचिन के खेल से भारत का नाम क्रिकेट के इतिहास में सबसे ऊपर लिखा जाएगा। वास्तव में सचिन एक अनमोल और असली रत्न है।

बस-भाड़े में कमी हो

रोशन लाल बाली, महरौली
देश की राजधानी दिल्ली में वर्तमान बस-भाड़ा इतना ज्यादा है कि मजदूरी करने वाला तबका अपने काम पर जाने से भी कतराने लगा है। दैनिक भोगी कर्मी को उतनी दिहाड़ी नहीं मिलती, उससे ज्यादा तो किराया लग जाता है। यदि सरकार गरीबों को रोजी-रोटी से जोड़े रखना चाहती है तो डीटीसी के वर्तमान बस-भाड़े को रद्द कराकर पुराना बस-भाड़ा दो, चार, छह, आठ रुपये वाला सलैब पुन: वापस लाया जाये ताकि मजदूर तबका राहत पा सके।

पाक सरकार नाकाम

सोहन लाल शृंगी, इंदौर
दैनिक ट्रिब्यून में विष्णु गुप्त का लेख ‘तालिबान को स्वीकारो या फिर सिर कलम’ पढ़ा। पाकिस्तान में तालिबान द्वारा दो सिख भाइयों के सिर कलम करके सबसे निकृष्टï कार्य को अंजाम दिया। इससे साफ होता है कि अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा करने में पाक सरकार नाकाम रही है। हमारी सरकार भी पाकिस्तान सरकार को कड़ा संदेश देने में असहाय-सी नजर आती है। वास्तव में आज के समय में भारत को लाल बहादुर शास्त्री व इंदिरा गांधी जैसे दृढ़ देश-भक्त नेताओं की आवश्यकता है।


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